Sunday, 31 August 2025

अंबिकापुर। झारखंड सीमा से सटे बलराममपुर जिले में गुरुवार की रात हथियारबंद नक्सलियों ने सड़क निर्माण में लगे दो वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान बड़ी तादात में वहां नक्सली पहुंचे और काम में लगे मजदूरों को पीटकर वहां से भगा दिया। इसके बाद नक्सलियों ने वाहनों में आग लगा दी। बलरामपुर जिले का यह इलाका पूर्व में नक्सल प्रभावित रहा है। कुछ दिन पहले भी नक्सलियों ने बॉक्साइट माइन्स में धावा बोलकर तीन वाहनों को आग के हवाले कर दिया था।
बस्तर में हुई मुठभेड़
उधर दूसरी ओर बस्तर क्षेत्र के सुकमा जिले में नक्सलियों और पुलिस पार्टी के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ के दौरान नक्सली घने जंगलों का फायदा उठाते हुए वहां से भाग खड़े हुए। घटना स्थल से बड़ी तादात में नक्सल सामग्री बरामद की गई है।
जिले के पुलिस अधीक्षक ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि चिंतागुफा क्षेत्र के दुब्बाकोंटा और पेंटापाड के जंगलों में नक्सलियों के जमावड़े की खबर मिली थी। सुबह करीब साढ़े 10 बजे डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त पार्टी उक्त स्थल पर पहुंची। यहां 20 की संख्या में नक्सली नजर आए जिनमें से करीब 8 नक्सली वर्दी में नजर आए। फायरिंग करने पर नक्सली पेड़ों की आढ़ लेकर वहां से फरार हो गए। क्षेत्र में सघन सर्चिंग जारी है।

लोरमी  । जूनापारा धान खरीदी केंद्र की पोल बेमौसम बारिश ने खोलकर रख दी है. इसका खामियाजा मासूम किसानों को भुगतना पड़ा है, जिनका बिना तौलाई के खुले में रखा धान बारिश में भीग गया है ।
बता दें कि खरीदी केंद्र में दर्जनभर किसान समर्थन मूल्य पर अपना धान बेचने के लिए टोकन कटाने के बाद सप्ताह भर पहले ही केंद्र में आ गए थे, लेकिन धान खरीदी केंद्र प्रभारी के द्वारा बारदाने की कमी होने का हवाला देते हुए धान की तौलाई नहीं की गई. अब बेमौसम बारिश से उनका सैकड़ों क्विंटल धान पानी में डूब गया है. इससे परेशान किसानों के चेहरे में बिक्री को लेकर पशोपेश में पड़ गए हैं ।
किसानों का आरोप है कि धान खरीदी केंद्र में लगातार बारदाने की कमी का हवाला देते हुए उन्हें प्रभारी चक्कर लगवाया रहे हैं, शुक्रवार को हुई बेमौसम बारिश से जहां खरीदी केंद्र परिसर पूरी तरह से तालाब में तब्दील हो गया, और किसानों के खून-पसीने की मेहनत से पैदा हुआ सैकड़ों क्विंटल धान पानी में डूब गया. किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्र में बिचौलिए सक्रिय हैं, जिनका काम कमीशन के चक्कर में पहले किया जाता है. अगर व्यवस्था सही रहती तो उन्हें यह मुसीबत नहीं उठानी पड़ती ।
इस पूरे मामले को लेकर धान खरीदी प्रबंधक रामचंद्र जायसवाल ने धान खरीदी केंद्र, जूनापारा में बारदाने की कमी होने की बात कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया, वहीं धान खरीदी केंद्र में बदहाली को लेकर जब कोटा के एसडीएम कीर्तिमान राठौर से बात की गई तो उन्होंने खाद्य निरीक्षक को जांच करने निर्देश देने की बात कही है ।

गरियाबंद  । सप्ताह भर में मिल जाने वाली मनरेगा की मजदूरी साल भर बाद भी नहीं मिल पाई है. अब बेटी की शादी सिर पर है, ऐसे में परिवार के मुखिया ने पैसा नहीं मिलने पर परिवार सहित जनपद के मनरेगा कार्यालय में आत्मदाह करने की चेतावनी दी है ।
खूटगांव पंचायत में कच्चे झोपड़ी में रहकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले प्रभुलाल के परिवार में तीन बेटी व पत्नी है, दो छोटी बेटी को छोड़कर बड़ी बेटी शांति व पत्नी ईश्वरी बाई ने जनवरी 2018 में गांव के मनरेगा योजना में 4 सप्ताह तक काम किया था, लेकिन मजदूरी के तौर पर 7 हजार रुपए की राशि उन्हें अब तक नहीं मिली. प्रभु लाल ने बताया कि पिछले एक साल में 30 से भी ज्यादा बार बैंक और मनरेगा दफ्तर का चक्कर काट चुका है, लेकिन समस्या दूर नहीं हुई है ।
उसने बताया कि बैंक के कहने पर दोबारा आईडी जमा भी करवाया फिर भी मजदूरी की राशि खाते में जमा नहीं हुई. उसने बताया कि फरवरी में बड़ी बेटी की शादी है, उसे किसी भी सरकारी योजना से मदद नहीं मिलती है. लिहाजा, मजदूरी के 7 हजार रकम भी उसके काम आ जाएगा. लिखने-पढ़ने में कमजोर होने के कारण अब तक कहीं लिखित शिकायत या मांग नहीं कर सका है. उसने कहा है कि फरवरी के पहले अगर उसे मजदूरी नहीं मिली तो परिवार समेत जनपद के मनरेगा दफ्तर में धरना देगा, इसके बाद भी रकम नहीं मिली तो वह परिवार सहित आत्मदाह कर लेगा।
मामले में मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी एलके वर्मा ने कहा कि बैंक खाते में मिलान या बैंकिग त्रुटि के चलते 150 परिवार का सवा तीन लाख का भुगतान साल भर से अटका है. मनरेगा की ओर से खाते में रुपए भेजने की सारी प्रक्रिया पूरी है. बैंक के कुछ फार्मलिटी हितग्राही परिवार की ओर से पूरे नहीं किए गए हैं. उसके पूरे होते ही खाते में स्वमेव राशि जमा हो जाएगी ।

दंतेवाड़ा। उत्‍क़ष्‍ठ कार्य करने वाले राज्‍य के 24 पुलिस कर्मियों को गणतंत्र दिवस पर सम्‍मानित किया जाएगा। इनमें तीन जांबाजों को दंतेवाड़ा के कच्‍चेघाटी मुठभेड़ में तीन हार्डकोर नक्‍सलियों ढेर करने पर दिया जा रहा है। वर्तमान में ये अधिकारी रायपुर व अन्‍य स्‍थानों पर पदस्‍थ हैं।
पुलिस कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 26 जनवरी को राज्‍य के 24 पुलिस अधिकारी - कर्मचारियों को उत्‍क़ष्‍ठ कार्य के लिए सम्‍मानित किया जा रहा है। इनमें वीरता पदक से सम्‍मानित होने वाले अधिकारियों में तीन को दंतेवाड़ा में एक महिला सहित तीन हार्डकोर नक्‍सलियों को ढेर करने के लिए दिया जा रहा है। ये पुलिस अधिकारी है राजेश देवदास, अनंत प्रधान और मंगल मांझी है।
मुठभेड़ के दौरान इनकी पदस्‍थापना दंतेवाड़ा और फरसपाल थाने में था। ज्ञात हो कि 5 अगस्‍त 2016 को मुखबिर की सूचना पर तत्‍कालीन एएसपी डॉ अभिषेक पल्‍लव के नेतृत्‍व में दोनों थाने से जवान कच्‍चेघाटी पहुंचे थे। जहां पहले से मौजूद नक्‍सलियों ने फोर्स पर फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई में तीन नक्‍सली ढेर हुए थे। जिनकी पहचान नेशनल पार्क इंद्रावती बार्डर के सदस्य के रुप में हुई है।
मारी गई महिला नक्सली गीता उर्फ मनकी उर्फ मनीला पिता जारो, फागू उर्फ निशांत पिता मया तेलामी और नक्सली सोमा उर्फ अजीत पिता भीमा मड़कम था। सोमा, पापाराव के सुरक्षा दस्ते में बतौर गनमैन का काम करता था। इन नक्सलियों पर पांच से आठ लाख रुपए के इनाम घोषित थे। इसके अलावा मौके से दो देशी कट्टा, एक रायफल, कारतूस, ग्रेनेड, जिलेटिन सहित अन्य सामग्रियां बरामद हुई है।

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