Publicuwatch24.com-दंतेवाड़ा। जिले में लंबे समय से चर्चित फर्जी निविदा घोटाले मामले के सामने आने के बाद कलेक्टर कुणाल दुदावत ने निविदाओं की जांच कराई थी। जांच के बाद गड़बड़ी पाये जाने पर दंतेवाड़ा के आदिवासी विकास विभाग में पदस्थ रहे दो पूर्व सहायक आयुक्त डॉ. आनंदजी सिंह और रिटायर्ड सहायक आयुक्त केएस मसराम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि विभागीय लिपिक संजय कोड़ोपी फरार हैं, जिसकी तलाश की जा रही है।
दोनों अधिकारियों पर डीएमएफ (जिला खनिज न्यास निधि) से स्वीकृत कार्यों की निंविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निविदाएं पूरी करने का गंभीर आरोप है। तीनों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 318, 337, 340, और धारा 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। मिली जानकारी के अनुसार डॉ. आनंदजी सिंह की गिरफ्तारी जगदलपुर से और केएस मसराम की रायपुर से हुई है। दोनों अधिकारी दंतेवाड़ा में आदिवासी विकास विभाग में कार्यरत रह चुके हैं। दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
फर्जी निविदा घोटाले मामले की शिकायत मिलने पर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जांच के आदेश दिए थे। जांच में पाया गया कि सालों से विभाग में नियमों को दरकिनार कर चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए फर्जी निविदाएं तैयार की जा रही थीं। यह पूरा खेल बिना किसी सार्वजनिक सूचना या प्रक्रिया के, फाइलों की एडिटिंग और रिकॉर्ड में हेरफेर के जरिए किया गया। जांच में विकास कार्यों के लिए जारी 45 टेंडरों में गड़बड़ी पाई गई है। बताया जा रहा है कि अभी भी कई निर्माण कार्यों की फाइलों की जांच की जा रही है और इसमें और भी अफसरों और ठेकेदारों की भूमिका सामने आ सकती है। पुलिस और प्रशासन, इस घोटाले में ठेकेदारों की संलिप्तता की भी जांच कर रहे हैं। इस मामले में वर्तमान सहायक आयुक्त राजू कुमार नाग ने दंतेवाड़ा सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत दी, जिस पर पुलिस ने धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं फरार बाबू की तलाश की जा रही है।