
विजय शर्मा ने कहा कि जिस चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को आदर्श मानकर नक्सली (माओवादी) बस्तर में जल, जंगल, जमीन की बात करते हैं । उसी चीन में 3-4 जून 1989 की रात तियानमेन चैक में लोकतंत्र की मांग करने वाले 10 हजार छात्रों को टैंक-ताेप से कुचल दिया गया था । नक्सलियों के आदर्श माओ त्से तुंग के अनुसार राजनीतिक शक्ति बंदूक की नली से निकलती है की विचारधारा को लेकर नक्सलियों (माओवादियों) ने वर्षों से बस्तरतवासियों को उनके अधिकारों से वंचित रखते हुए, बस्तर की भूमि में हजारों निर्दोष आदिवासियों को मौत के घाट उतारा है। अब जबकि बस्तर इन नक्सलियों (माओवादियों) की खोखली विचारधारा से आजाद होकर विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। तो समय है ऐसे विचार पर संवाद करने का।