नई दिल्ली। IDBI बैंक के प्राइवेटाइजेशन को लेकर राहुल गांधी ने सरकार जोरदार हमला किया। बैंक कर्मचारियों के नाम खुला पत्र लिखकर राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जिस बैंक को कर्मचारियों ने घाटे से निकालकर 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा मुनाफे में पहुंचाया, उसे सरकार क्यों बेच रही है? राहुल ने कर्मचारियों के आरक्षण और नौकरी की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निजी जागीर की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए 1957 के हरिदास मुंद्रा मामले से लेकर मारुति के लिए कर्ज के दबाव तक के पांच उदाहरण गिना दिए।
राहुल गांधी ने 29 अक्टूबर को IDBI बैंक के कर्मचारियों के नाम संदेश जारी किया। शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इसे साझा किया। उन्होंने लिखा कि मार्च 2025 में बैंक कर्मचारियों का एक समूह उनसे संसद भवन में मिला था। कर्मचारियों ने उनसे सवाल किया था कि जिस बैंक को उन्होंने मुनाफे में पहुंचाया, सरकार उसे क्यों बेच रही है? राहुल ने कहा कि उन्होंने यह सवाल लोकसभा में भी उठाया था। सरकार से पूछा था कि एक मुनाफे वाले सरकारी बैंक को बेचने की जरूरत क्यों है और इसके कर्मचारियों और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा कैसे होगी। उनके मुताबिक, सरकार ने इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
राहुल ने अपने पत्र में IDBI की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि सात साल पहले बैंक घाटे में था, जबकि पिछले साल उसने 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा कमाया। उन्होंने इसका श्रेय बैंक कर्मचारियों को दिया। राहुल ने सरकार के फैसले पर राजनीतिक हमला करते हुए कहा, कांग्रेस के समय में IDBI देश का उद्योग खड़ा करने के लिए बना था, जबकि मोदी सरकार के समय पहले बोली देखी गई और फिर कीमत तय हुई। कांग्रेस के समय बैंक बनते थे, मोदी के समय बिकते हैं।
आरक्षण और कर्मचारियों की नौकरी पर भी उठाए सवाल
राहुल गांधी ने IDBI के निजीकरण के बाद कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि निजी मालिकाना हक होने पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों को मिलने वाला आरक्षण खत्म हो सकता है। उन्होंने कर्मचारियों की सेवा शर्तों और नौकरी की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए।
राहुल के मुताबिक, 2003 में सरकार ने संसद में भरोसा दिया था कि IDBI में उसकी हिस्सेदारी हमेशा कम से कम 51 फीसदी रहेगी। उन्होंने कहा कि भले ही यह वादा कानून का हिस्सा न हो, लेकिन संसद में किया गया वादा देश की जनता से किया गया वादा है। उन्होंने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि वह उनके साथ खड़े हैं और उनकी जायज मांगों का समर्थन करते हैं।
निर्मला सीतारमण का पलटवार, कांग्रेस के पांच पुराने मामले गिनाए
निर्मला सीतारमण तुरंत गांधी परिवार के 5 कारनामे गिनाते हुए पलटवार किया। कहा, जिस पार्टी ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निजी संस्थाओं की तरह इस्तेमाल किया और बैंक कर्मचारियों पर मनमाने तरीके से कर्ज देने का दबाव बनाया, वो हमें नसीहत ना ही दे तो ठीक है।
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Saturday, October 31
