publicuwatch24.-रायपुर। देश की राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व और अल्पसंख्यक समुदाय की राजनीतिक-प्रशासनिक भागीदारी को लेकर अक्सर बहस छिड़ती रहती है। विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाया जाता रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शासनकाल में अल्पसंख्यकों को हाशिए पर रखा जाता है। हालांकि, यदि ज़मीनी हकीकत, पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और प्रशासनिक तंत्र पर नजर डालें, तो ये आरोप पूरी तरह बेबुनियाद साबित होते हैं। बीजेपी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ धर्म या वर्ग के बजाय योग्यता, सुशासन और सर्वसमावेशी विकास को प्राथमिकता दे रही है। इस बात पर गौर करें तो छत्तीसगढ़ में भी इनके पंसद के कई अधिकारी उच्च पदों पर सेवाएं दे रहे है।
राष्ट्रीय संगठन में मुस्लिम चेहरों को अहम कमान
हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने संगठन में बड़े बदलाव करते हुए मुस्लिम समुदाय के दिग्गज नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। प्रोफेसर तारिक मंसूर: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के पूर्व कुलपति और शिक्षाविद प्रो. तारिक मंसूर को पार्टी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा है। संगठन में उनकी मजबूत उपस्थिति अल्पसंख्यक समुदाय तक पार्टी की पहुंच को और पुख्ता कर रही है। कुंवर बासित अली उत्तर प्रदेश के मेरठ से ताल्लुक रखने वाले ज़मीनी नेता कुंवर बासित अली को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे लगातार जनहित योजनाओं और संगठन विस्तार के जरिए अल्पसंख्यक समाज को पार्टी से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
मंत्रालय से लेकर मैदान तक: छत्तीसगढ़ और देश में प्रशासनिक पदों पर मुस्लिम अधिकारियों का दबदबा
भारत में सिविल सेवाओं में चयन यूपीएससी और राज्य लोक सेवा आयोग की मेरिट के आधार पर होता है, लेकिन प्रशासनिक दक्षता और संवेदनशीलता को देखते हुए महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति शासन द्वारा की जाती है। छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों और केंद्रीय विभागों में वरिष्ठ मुस्लिम अधिकारी अहम और नीतिगत जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं-
शम्मी आबिदी (IAS): सचिव स्तर पर महिला एवं बाल विकास विभाग सहित प्रशासनिक तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
मोहम्मद कैसर अब्दुलहक (IAS): पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग में सचिव पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
तंबोली अय्याज फकीरभाई (IAS): मंत्रिमंडल सचिवालय में संयुक्त सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
इफ्फत आरा (IAS): आईएएस (IAS) इफ्फत आरा वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
आईए सिद्दीकी छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग में अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने रायपुर संभाग में सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर के रूप में और इससे पहले कोटा (बिलासपुर) क्षेत्र में सब-डिविजनल ऑफिसर के रूप में काम किया है।
शहला निगार (IAS): कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव, कृषि विकास तथा किसान कल्याण विभाग जैसे प्रमुख महकमों की कमान संभाले हुए हैं।
डॉ. फरीहा आलम (IAS): स्कूल शिक्षा और श्रम विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में कार्य कर रही हैं। आरिफ एच. शेख (IPS): छत्तीसगढ़ कैडर के IPS अधिकारी हैं। वे रायपुर, बिलासपुर, बस्तर और बलौदाबाजार सहित छत्तीसगढ़ के 8 जिलों में SP) के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।
रेना जमील (IAS): रेना जमील छत्तीसगढ़ कैडर की 2019 बैच की एक भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले की कलेक्टर के रूप में पदस्थ हैं। मुश्ताक अली अंसारी: यह छत्तीसगढ़ कैडर में कार्यरत अधिकारी हैं, जो हाल ही में खनिज साधन विभाग जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रभारों में रहे हैं।
आयशा अंसारी: इन्होंने मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा में 12वीं रैंक प्राप्त कर डिप्टी कलेक्टर का पद हासिल किया है।
सिम्मी नाहिद: छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) की अधिकारी सिम्मी नाहिद वर्तमान में अपर कलेक्टर, रायपुर के पद पर पोस्टेड हैं।
मोहम्मद आरिफ़: वर्तमान में रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर हवाई अड्डा निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने 6 अक्टूबर, 2026 को इस पद का कार्यभार संभाला। राजधानी रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के प्रमुख पुलिस थानों में मुस्लिम समुदाय के अधिकारी थाना प्रभारी के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके अलावा तहसीलदार, डिप्टी कलेक्टर सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर भी मुस्लिम समुदाय के अधिकारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये अधिकारी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और जनसेवाओं के प्रभावी संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
पूर्वाग्रहों और राजनीतिक आरोपों का करारा जवाब
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तक, कई प्रमुख मुस्लिम नेताओं को कैबिनेट और संवैधानिक पदों पर सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। राजनीतिक दल भले ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में सांसदों के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाते हों, लेकिन बीजेपी ने प्रशासनिक नियुक्तियों, आयोगों और संगठनात्मक पदों पर मुस्लिम चेहरों को नेतृत्व देकर यह साबित कर दिया है कि उसकी नीतियां पारदर्शी और कार्य-आधारित (Result-Oriented) हैं।
प्रशासनिक सेवाओं में योग्यता और जिम्मेदारी अहम
भारतीय प्रशासनिक सेवा और अन्य सिविल सेवाओं में अधिकारियों का चयन निर्धारित प्रतियोगी परीक्षाओं और सेवा नियमों के तहत होता है। इसके बाद उनकी पदस्थापना, स्थानांतरण और अतिरिक्त प्रभार शासन के प्रशासनिक निर्णयों के अनुसार तय होते हैं। किसी अधिकारी के कार्य का मूल्यांकन उसके विभागीय दायित्वों, प्रशासनिक फैसलों और कामकाज के परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए। इसी तरह राजनीतिक संगठनों में प्रतिनिधित्व का आकलन केवल नियुक्तियों से नहीं, बल्कि संगठन में भागीदारी और समुदाय से जुड़े मुद्दों पर किए गए काम से भी किया जा सकता है।
मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर राजनीतिक बहस
देश की राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच मतभेद लंबे समय से रहे हैं। विपक्षी दलों की ओर से मुस्लिम सांसदों, मंत्रियों और संगठनात्मक पदाधिकारियों की संख्या को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। दूसरी ओर भाजपा अपनी राष्ट्रीय टीम में तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली जैसे नेताओं की मौजूदगी को संगठनात्मक भागीदारी के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर सकती है।
