शबनम बोलीं-पहले अलग से बचत करना था मुश्किल, अब बेटी के सपनों के लिए जोड़ पा रही राशि
publicuwatch24.-रायपुर। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बचत का भी माध्यम बन रही है। जशपुर जिले की हितग्राही श्रीमती शबनम खातून हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि को अपनी बेटी के नाम खोले गए सुकन्या समृद्धि योजना के खाते में जमा कर रही हैं। छोटी-छोटी बचत के जरिए वे आज से ही बेटी की पढ़ाई और भविष्य के लिए आर्थिक आधार तैयार कर रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। महिलाएं अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार इस राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों, बच्चों की शिक्षा, पोषण और बचत में कर रही हैं। शबनम ने इस नियमित सहायता को अपनी बेटी के भविष्य से जोड़कर बचत की राह चुनी है।
बेटी के नाम सुकन्या समृद्धि में हर महीने निवेश
शबनम खातून बताती हैं कि पहले सीमित पारिवारिक आय के बीच बेटी के लिए अलग से नियमित बचत कर पाना आसान नहीं था। महतारी वंदन योजना से हर महीने राशि मिलने के बाद उन्होंने इसे बेटी के नाम सुकन्या समृद्धि खाते में जमा करना शुरू किया। जरूरत पड़ने पर वे इस सहायता का उपयोग बेटी की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए भी करती हैं।
उनका मानना है कि आज की छोटी-छोटी बचत आगे चलकर बेटी की शिक्षा और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगी। नियमित आर्थिक सहायता ने उन्हें बेटी के भविष्य के लिए योजनाबद्ध तरीके से बचत करने का अवसर दिया है।
“हर महीने मिलने वाली राशि बेटी के भविष्य के लिए सहेज रही हूं”
शबनम खातून कहती हैं, “महतारी वंदन योजना से हर महीने मेरे खाते में एक हजार रुपये मिलते हैं। इस राशि को मैं अपनी बच्ची के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा करती हूं और जरूरत पड़ने पर उसकी पढ़ाई-लिखाई में उपयोग करती हूं। इस सहायता से मुझे बेटी के भविष्य के लिए बचत करने का अवसर मिला है। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद देती हूं।”
मां को आर्थिक संबल, बेटी के भविष्य को मिल रही मजबूती
महतारी वंदन योजना से मिली राशि को बेटी की शिक्षा और दीर्घकालीन बचत से जोड़ने की शबनम की पहल आर्थिक सशक्तिकरण की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है। नियमित सहायता से वे न केवल अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं पर स्वयं निर्णय ले पा रही हैं, बल्कि बेटी के भविष्य के लिए भी व्यवस्थित रूप से राशि सहेज रही हैं।
शबनम की कहानी बताती है कि हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता जब नियमित बचत से जुड़ती है, तो वह परिवार के वर्तमान के साथ आने वाली पीढ़ी के भविष्य को भी मजबूत करने का माध्यम बन सकती है।
