publicuwatch24.-जगदलपु। NIA की विशेष कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के चर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले की सुनवाई की तारीख बढ़ा दी है, इस मामले में अब अंतिम फैसला अब 5 सितंबर को आएगा। आपको बता दें कि इससे पहले 12 अगस्त को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आगामी 31 अगस्त के लिए फैसला सुरक्षित रखा था। वहीं, आज कोर्ट ने सुनवाई की डेट बढ़ा दी है। 25 मई 2013 को इस नक्सली हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ 27 लोग मारे गए थे। भीषण गोलाबारी के बाद चुन-चुन कर कांग्रेस के नेताओं को मारा गया था। हत्या के बाद पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी माओवादियों ने ली थी और माना था कि इस हत्याकांड को उन्होंने एंबुश के जरिए अंजाम दिया है।
पूरे मामले में घटना के बाद से ही कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ सरकार और पुलिस पर सुरक्षा के चूक के आरोप लगाए थे। केंद्र सरकार ने उस वक्त यह जांच एनआईए को सौंप दी थी। एनआईए ने अपनी जांच में 40 मुख्य आरोपियों के साथ डेढ़ सौ से अधिक अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और मामले की जांच शुरू की। जांच के बाद 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अभियोजन के दौरान इनमें से एक की मौत हो गई, जबकि 10 लोग अब भी पुलिस की हिरासत में हैं।
साल 2013 के आखिर में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। पिछले 2 बार से भाजपा की सरकार थी। 10 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस पूरा जोर लगाना चाह रही थी। कांग्रेस ने पूरे राज्य में परिवर्तन यात्रा निकालने का ऐलान किया है। 25 मई 2013 को सुकमा जिले में परिवर्तन यात्रा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर जा रहा था। 25 गाड़ियों में करीब 200 लोग थे। कांग्रेस नेता कवासी लखमा, नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल, महेन्द्र कर्मा, मलकीत सिंह गैदू और उदय मुदलियार समेत छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लगभग सभी शीर्ष नेता काफिले में शामिल थे।
शाम को 4 बजे काफिला जैसे ही झीरम घाटी से गुजरा, तभी नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता रोक दिया। कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही पेड़ों के पीछे छिपे 200 से ज्यादा नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। करीब डेढ़ घंटे तक गोलियां चलती रहीं। इसके बाद नक्सलियों ने एक-एक गाड़ी को चेक किया। जिन लोगों की सांसें चल रहीं थी उन्हें फिर से गोली मारी। जिंदा लोगों को बंधक बनाया। हमले में 32 से भी ज्यादा लोगों की मौत हुई। बताया जाता है कि नक्सलियों का मुख्य टारगेट बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा थे। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि नक्सलियों ने कर्मा को करीब 100 गोलियां मारी थीं और चाकू से शरीर पूरी तरह छलनी कर दिया था। बताया जाता है कि नक्सलियों ने उनके शव पर चढ़कर डांस भी किया था।
भूपेश बघेल ने जांच पर उठाए सवाल
बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में NIA कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी है। आज 31 अगस्त को फैसला आने की संभावना थी, लेकिन आज सुनवाई के बाद NIA कोर्ट ने फैसले की तारीख आगे बढ़ा दी है। लेकिन फैसला आने से पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने NIA की जांच पर सवाल उठाए दिए हैं।
बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि FIR में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की गई और मौके पर मौजूद कई लोगों के बयान भी नहीं लिए गए। उन्होंने कहा कि घटना के पीछे के षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने की दिशा में जांच नहीं हुई। बघेल ने बताया कि मुख्यमंत्री रहते उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री से जांच राज्य सरकार को सौंपने की मांग की थी।
SIT गठित करने पर NIA हाईकोर्ट पहुंच गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार ने भी मामले की आगे जांच के लिए कोई कदम नहीं उठाया, जिससे लगता है कि भाजपा मामले को दबाना चाहती है। इसके पहले पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी घटनाक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि वे खुद इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं, और जगदलपुर पहुंचकर NIA के सामने अपनी आंखों देखी घटना का बयान दर्ज करा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि घटना वाले दिन पूरे इलाके में पुलिस की मौजूदगी लगभग शून्य थी। रास्ते में कहीं भी पर्याप्त फोर्स तैनात नहीं थी. उन्होंने कहा कि उनके बयान में घटना से जुड़े सभी अहम पहलुओं को दर्ज कराया गया है। अगर जांच और फैसले में इन तथ्यों को जगह मिलती है, और इस घटना के लिए जिम्मेदारी भी तय होती है, तभी पीड़ितों और कांग्रेस नेताओं को न्याय मिलने का संतोष होगा।
