publicuwatch24.-रायपुर। छत्तीसगढ के सुकमा जिले में संचालित बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों से भी जोड़ रही है। विकासखंड कोंटा के ढोढरा गांव की सोढ़ी तिरपो इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं।
पहले सोढ़ी तिरपो खेती के लिए हल-बैल और पारंपरिक तरीकों पर निर्भर थीं। खेतों की जुताई और अन्य कृषि कार्यों के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ती थी। आधुनिक कृषि यंत्रों का संचालन उनके लिए एक नई बात थी।
प्रशिक्षण ने बढ़ाया आत्मविश्वास
जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में तुलसी महिला ग्राम संगठन द्वारा संचालित कस्टम हायरिंग सेंटर से उन्हें पावर टिलर चलाने का प्रशिक्षण मिला। क्लस्टर पीआरपी श्रीमती पूजा कोड़ी के निरंतर मार्गदर्शन और अपने प्रयासों से उन्होंने मशीन चलाना सीखा। आज वे पूरे आत्मविश्वास के साथ पावर टिलर का संचालन कर रही हैं।
आधुनिक खेती से बढ़ी सुविधा और उत्पादन
सोढ़ी तिरपो अपने 30 डिसमिल खेत में मक्का और मिर्च की आधुनिक तकनीक से खेती कर रही हैं। पावर टिलर के उपयोग से खेती का काम पहले की तुलना में तेज, आसान और कम खर्चीला हो गया है। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार हुआ है।
छोटे किसानों के लिए बना सहारा
कस्टम हायरिंग सेंटर का लाभ केवल सोढ़ी तिरपो तक सीमित नहीं है। आसपास के छोटे और सीमांत किसान भी यहां से उचित किराए पर कृषि यंत्र लेकर समय पर खेती कर रहे हैं। इससे उनकी लागत कम हुई है और कृषि कार्य अधिक सुविधाजनक बन गया है।
महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल
सोढ़ी तिरपो अब कृषि यंत्रों का संचालन ही नहीं करतीं, बल्कि उनके रख-रखाव और किसानों को समय पर सेवा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। उनकी सफलता से गांव की अन्य महिलाओं में भी आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं।
सरकारी योजना से बदली जिंदगी
सोढ़ी तिरपो की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। बिहान योजना और कस्टम हायरिंग सेंटर की पहल ने न केवल उनकी आजीविका मजबूत की है, बल्कि सुकमा जिले में महिला सशक्तिकरण और आधुनिक कृषि की नई मिसाल भी स्थापित की है।
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Friday, November 6
