राजनाँदगाँव/रायपुर । छत्तीसगढ़ अँचल का एक और हीरा कलाकार, रतन बेटा प्रसिद्ध कलाकार, हबीब तनवीर का साथी कलाकर अमरदास मानिकपुरी इस दुनिया को छोड़ कर चला गया हैं. अमरदास का 82 वर्ष की आयु में उनके अपने गृह ग्राम राजनाँदगाँव के कोलिहापुरी में आज निधन हुआ. अमरदास के निधन से कलाजगत में गहरा शोक है. संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू ने उन्हें विमन्र श्रद्धांजलि दी । संस्कृति विशेषज्ञ अशोक तिवारी बताते हैं कि अमरदास बचपन से लोकरंग से जुड़ गए थे. वे अपने पिता दर्शनदास के साथ नाचापार्टी में काम करने लगे थे. बाद में फिर उन्होंने नाचा के पुरोधा दाऊ मंदरा जी के साथ भी काम किया. इस दौरान हबीब तनवीर की नज़र अमरदास पर पड़ी. तनवीर ने अमरदास को अपने साथ ले आए. इस तरह अमरदास की एक नई शुरुआत तनवीर के साथ उनके नया थियेटर से हुई ।
अमरदास नया थियेटर में संगीतकार थे. वे तबला, ढोलक, मांदर के मास्टर कलाकार थे. तनवीर के नाटकों में लोक संगीत का ऐसा जादू उन्होंने पिरोया है कि आज भी उसकी गूँज देश-दुनिया में है. उन्होंने 50 वर्षों तक नया थियेटर में काम किया. तनवीर साहब के निधन के बाद भी अमरदास नया थियेटर से जुड़े और उन्होंने साथ नहीं छोड़ा. कुछ साल पहले ही वे नया थियेटर से विदा लेकर भोपाल से अपने गाँव लौटे थे. हालांकि विशेष बुलावे वे अपनी प्रस्तुति देने भोपाल जाते थे. नया थियेटर से जुड़ने के बाद उन्होंने तनवीर जी के साथ करीब 40 देशों की यात्राएँ की थी ।
अशोक तिवारी जी कहते हैं कि पिछले लगभग 25 साल से उनसे नज़दीकी परिचय रहा है. 6 महीने पहले कोलिहापुर उनके गाँव जाकर मैंने अमरदास से मुलाकात की थी. मैं उन्हें मौसिया कहकर बुलाता था. बूढ़ापे की वजह से तबियत अच्छी नहीं रहती थी. वे कबीरपंथ के उपासक थे. भारत सरकार की ओर से संगीत के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उन्हें देश का प्रतिष्ठित पुरस्कार संगीत नाटक अकादमी से भी नवाजा गया था ।