खरीफ 2026 की उपलब्धियों की समीक्षा, रबी 2026-27 की तैयारियों और कार्ययोजना पर हुई विस्तृत चर्चा
फसल विविधीकरण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और कृषि नवाचारों पर विशेष जोर, किसानों तक समय पर योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश
सरगुजा में लीची, स्ट्रॉबेरी, आलू और ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के साथ दलहन-तिलहन का रकबा बढ़ाने पर जोर
publicuwatch24.-रायपुर । किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए परंपरागत खेती के साथ पशुपालन, कुक्कुटपालन, मत्स्यपालन और उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए। सरगुजा संभाग में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। स्थानीय जलवायु, उपलब्ध संसाधनों और किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए फसल विविधीकरण तथा कृषि आधारित आजीविका गतिविधियों के विस्तार के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने गुरुवार को अम्बिकापुर में आयोजित कृषि एवं संबद्ध विभागों की संभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को ये निर्देश दिए।
बैठक में खरीफ वर्ष 2026 के दौरान कृषि एवं संबद्ध विभागों द्वारा संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके साथ ही आगामी रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों, बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता, फसल विविधीकरण, कृषि उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों को शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के संबंध में चर्चा हुई। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने कहा कि खरीफ सीजन में प्रदेश के साथ सरगुजा संभाग के सभी जिलों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इसी उपलब्धि को आगे बढ़ाते हुए रबी सीजन में भी सभी विभाग बेहतर समन्वय के साथ निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति सुनिश्चित करें।
फसल विविधीकरण से बढ़ेगी किसानों की आय, दलहन-तिलहन और प्राकृतिक खेती को मिले बढ़ावा
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने कहा कि किसानों को परंपरागत फसलों के साथ वैकल्पिक एवं अधिक लाभकारी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है। सरगुजा संभाग में दलहन, तिलहन, प्राकृतिक खेती और उद्यानिकी फसलों के विस्तार की अच्छी संभावनाएं हैं। उन्होंने रबी पड़ती भूमि में उपलब्ध नमी का उपयोग कर अतिरिक्त क्षेत्राच्छादन बढ़ाने तथा ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन के लिए उन्नत एवं प्रमाणित बीजों के उपयोग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) की समीक्षा करते हुए किसानों को योजना का अधिकाधिक लाभ दिलाने के निर्देश दिए। विशेष रूप से सरसों की खेती का रकबा और उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों को उपार्जन व्यवस्था की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए जागरूकता गतिविधियां संचालित करने को कहा। उन्होंने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
सरगुजा की अनुकूल जलवायु का लाभ उठाएं, लीची, स्ट्रॉबेरी और आलू की खेती का करें विस्तार
उद्यानिकी विभाग की समीक्षा के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि सरगुजा संभाग की जलवायु विभिन्न प्रकार की उद्यानिकी फसलों के उत्पादन के लिए अनुकूल है। इस संभावना का लाभ उठाते हुए किसानों को लीची, स्ट्रॉबेरी, आलू और ऑयल पाम जैसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से आलू उत्पादन का क्षेत्रफल बढ़ाने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से उत्पादकता में वृद्धि के प्रयास करने के निर्देश दिए।
बैठक में ऑयल पाम एवं अन्य फलदार पौधों के रोपण क्षेत्रों में अंतरवर्तीय फसल उत्पादन, धान आधारित फसल पद्धति में उद्यानिकी फसलों के समावेश तथा क्षेत्र की जलवायु के अनुरूप फसलों के चयन पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराते हुए उद्यानिकी के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने के अवसर विकसित किए जाएं।
रबी सीजन के लिए बीज और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश
कृषि उत्पादन आयुक्त ने रबी वर्ष 2026-27 के लिए बीज, उर्वरक एवं अन्य कृषि आदानों की मांग, उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए सभी जिलों में अग्रिम कार्ययोजना तैयार कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
बैठक में फर्टिलाइजर सेल फ्रेमवर्क (एफएफएस) के माध्यम से उर्वरक वितरण प्रणाली के पायलट जिलों के अनुभवों तथा रबी सीजन से इसे राज्यभर में लागू करने की आवश्यक तैयारियों पर चर्चा की गई। साथ ही श्साथी-2श् प्रणाली से बीज वितरण, एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन, कृषि आदान गुणवत्ता नियंत्रण, हरी खाद एवं नील हरित काई के माध्यम से पोषण प्रबंधन और प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के निर्धारित संकेतकों की प्रगति की समीक्षा की गई।
पशुपालन और डेयरी गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
पशुधन विकास विभाग की समीक्षा में कृषि उत्पादन आयुक्त ने कृत्रिम गर्भाधान, वत्सोत्पादन, पशु टीकाकरण, गौशाला संचालन तथा गौधाम योजना की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने और पशुपालकों को विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए। बैठक में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) एवं पीपीआर टीकाकरण, मोबाइल वेटरिनरी यूनिट की गतिविधियों, दुग्ध सहकारी समितियों के गठन तथा दुधारू पशु प्रदाय संबंधी पायलट परियोजना की समीक्षा की गई।
उन्होंने पशुपालन, बकरीपालन और कुक्कुटपालन जैसी गतिविधियों को ग्रामीण परिवारों की अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए इनके विस्तार के लिए विभागीय समन्वय और हितग्राहीमूलक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। बैठक में पशु चिकित्सालयों एवं औषधालयों के भवन निर्माण, पशु कल्याण से संबंधित गतिविधियों तथा अन्य विभागीय कार्यक्रमों पर भी चर्चा की गई।
मत्स्यपालन में आधुनिक तकनीकों और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
मत्स्यपालन विभाग की समीक्षा के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने मत्स्यपालकों के लिए कार्यशालाएं आयोजित कर आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मत्स्यपालन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण साधन है। इसके लिए उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उत्पादन बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जाएं।
बैठक में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, राज्य शासन की योजनाओं, किसान क्रेडिट कार्ड की प्रगति, नेशनल फिशरमेन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीयन तथा अमृत सरोवरों को मत्स्यपालन गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाओं की समीक्षा की गई। मत्स्यपालन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।
स्थानीय संसाधनों के अनुरूप कृषि नवाचारों को दें प्राथमिकता – संभागायुक्त श्री नरेंद्र दुग्गा
संभागायुक्त श्री नरेंद्र दुग्गा ने कहा कि सरगुजा संभाग कृषि एवं उससे जुड़ी आजीविका गतिविधियों के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। कृषि के साथ पशुपालन, कुक्कुटपालन, मत्स्यपालन और उद्यानिकी के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर विकसित हो रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक जिले की भौगोलिक परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कृषि नवाचारों को प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही परंपरागत कृषि पद्धतियों के उपयोगी पहलुओं को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़कर किसानों को अधिक लाभ दिलाने की दिशा में कार्य किया जाए।
सभी जिलों के कलेक्टरों ने प्रस्तुत की कृषि योजनाओं की प्रगति और आगामी कार्ययोजना
बैठक में सरगुजा संभाग के सभी जिलों के कलेक्टरों ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपने-अपने जिलों में खरीफ 2026 की उपलब्धियों, कृषि योजनाओं की प्रगति, फसल विविधीकरण, रबी सीजन की तैयारियों तथा आगामी कार्ययोजना की जानकारी प्रस्तुत की। कृषि एवं संबद्ध विभागों के राज्य स्तरीय अधिकारियों ने योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों, निर्धारित लक्ष्यों और आवश्यक सुधारों के संबंध में जिला अधिकारियों का मार्गदर्शन किया।
बैठक में कृषि संचालक राहुल देव, संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं चंद्रकांत वर्मा, संचालक उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी लोकेश कुमार तथा संचालक मत्स्यपालन नारायण सिंह नाग उपस्थित रहे। सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत, जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास, सूरजपुर कलेक्टर सुश्री रेना जमील, बलरामपुर-रामानुजगंज कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर कलेक्टर श्रीमती संतन देवी जांगड़े तथा कोरिया कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव सहित सभी जिलों के जिला पंचायत सीईओ और कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
