publicuwatch24.-रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी का स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट आने वाले समय में निजी ऑपरेटर के हाथों में जा सकता है। केंद्र सरकार ने देश के 11 एयरपोर्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत 50 साल की कंसेशन अवधि पर देने की तैयारी की है। इसके लिए एयरपोर्ट को पांच समूहों में बांटने का प्रस्ताव है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) से प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। प्रस्ताव के अनुसार, बड़े एयरपोर्ट को छोटे या मध्यम एयरपोर्ट के साथ समूह में रखा जाएगा।
विधान शाखा प्रत्येक समूह का संचालन और विकास एक ही निजी कंपनी को सौंपने की योजना है। सरकार का कहना है कि इससे निजी निवेश बढ़ने के साथ एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर और यात्री सुविधाओं में सुधार हो सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था में रायपुर और औरंगाबाद एयरपोर्ट को एक साथ रखा गया है। इसके अलावा अमृतसर-कांगड़ा गग्गल, वाराणसी-गया-कुशीनगर, भुवनेश्वर-हुबली और तिरुचिरापल्ली-तिरुपति को अलग-अलग समूहों में शामिल किया गया है। 11 एयरपोर्ट के संचालन और विकास में निजी कंपनियों की ओर से करीब 8,622 करोड़ रुपए निवेश किए जाने का अनुमान है। रायपुर-औरंगाबाद समूह के लिए भी निजी निवेश प्रस्तावित है। सरकार ने बाजार में अत्यधिक केंद्रीकरण और कर्ज से जुड़े जोखिम को देखते हुए एक ही बोलीदाता को दिए जाने वाले समूहों की संख्या सीमित रखने का प्रस्ताव रखा है।
AAI कर्मचारियों को लेकर भी प्रावधान
निजी संचालन शुरू होने के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के मौजूदा कर्मचारियों को लेकर भी व्यवस्था प्रस्तावित है। निजी कंपनी को पहले एक साल तक संयुक्त प्रबंधन करना होगा। इसके बाद कम से कम तीन साल तक AAI के 60% कर्मचारियों को बनाए रखने का प्रस्ताव है। पांच ग्रुप में 11 एयरपोर्ट अमृतसर और कांगड़ा-गग्गल वाराणसी, गया और कुशीनगर भुवनेश्वर और हुबली रायपुर और औरंगाबाद तिरुचिरापल्ली और तिरुपति
AAI ने एयरपोर्ट के चयन के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई। पहले 12 बड़े एयरपोर्ट का यात्री यातायात, उपलब्ध भूमि, व्यावसायिक क्षमता और वित्तीय प्रदर्शन जैसे मानकों पर मूल्यांकन किया गया। इसके बाद 136 छोटे एयरपोर्ट का आकलन किया गया कि उन्हें बड़े एयरपोर्ट के साथ किस तरह जोड़ा जा सकता है। इसी प्रक्रिया के आधार पर 11 एयरपोर्ट को मौजूदा PPP चरण के लिए चुना गया है।
