लगभग 12 लाख रुपए की लागत से नहर मरम्मत कार्य पूर्ण,
100 एकड़ कृषि भूमि होगी सिंचित, खरीफ और रबी दोनों फसलों को मिलेगा लाभ
publicuwatch24.-रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में कृषि अधोसंरचना को मजबूत करने तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पण्डरसिली के आश्रित ग्राम गुतकिया में वर्षों से निष्क्रिय पड़ी सिंचाई योजना को पुनर्जीवित कर किसानों के लिए उपयोगी बनाया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की भावना के अनुरूप सिंचित क्षेत्र के विस्तार तथा पुरानी सिंचाई परियोजनाओं के पुनरोद्धार के लिए जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई। इसके तहत गुतकिया व्यपवर्तन योजना की नहर मरम्मत का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।
मनरेगा से मिली नई गति
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत इस कार्य के लिए 11 लाख 98 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। जल संसाधन विभाग द्वारा निर्धारित समय-सीमा में नहर मरम्मत कार्य पूर्ण कर योजना को पुनः क्रियाशील बनाया गया है।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
नहर मरम्मत कार्य पूर्ण होने से ग्राम गुतकिया और आसपास के क्षेत्र की लगभग 100 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इससे किसान खरीफ के साथ-साथ रबी सीजन में भी खेती कर सकेंगे। सिंचाई की बेहतर व्यवस्था होने से फसल उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
फसल विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा
सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के बाद कृषि विभाग द्वारा किसानों को धान के साथ अन्य लाभकारी फसलों की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा तथा किसान अधिक आय अर्जित कर सकेंगे।
आदिवासी अंचल में कृषि विकास को मिलेगी नई दिशा
इस परियोजना से क्षेत्र के आदिवासी किसानों को विशेष लाभ मिलेगा। सिंचाई सुविधा सुदृढ़ होने से खेती अधिक लाभकारी बनेगी और ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। गुतकिया में पुरानी योजना का पुनर्जीवन कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का उदाहरण बनकर सामने आया है।
नहर मरम्मत कार्य पूर्ण होने से स्थानीय किसानों में उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों का मानना है कि यह पहल क्षेत्र में कृषि विकास, जल प्रबंधन और किसानों की आर्थिक समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
