हैदराबाद । सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में 1994 बैच के 25वी रि यूनियन में पुलिस महानिरीक्षक जी पी सिंह ने अपने विचार रखे. भारतीय पुलिस सेवा के 1994 बैच के अधिकारी जी पी सिंह ने बैच कि 25वी रि यूनियन मे आयोजित एक व्याख्यान समारोह मे अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने देश मे इम्पीरियल पुलिस को राष्ट्रीय स्वरूप देकर भारतीय पुलिस सेवा के रूप में विज़न तैयार किया और उसे उस मुकाम तक पहुचाया था ।श्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने देश मे विघटन और अराजकता फैलाने वाली ताकतों से सख्ती से निपटने और विरोध करने के लिये एवं देश को एक साथ एक धागे में पिरोकर रखने एवँ एकता और सुरक्षित रखने कि दृष्टि से यह भारतीय स्तर कि पुलिस सेवा का निर्माण किया था ।
जी.पी.सिंह ने यह भी कहा कि लेखक डेविड बेली ने अपनी पुस्तक पुलिस एवं पोलिटिकल डेवेलपमेंट इन इंडिया में भारतीय पुलिस विद्वानों कि प्रशंसा कि है जो अपनी निपुण कार्यकुशलता एवं अपने करियर कैलिबर के लिये पहचाना जाता है.उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान युग मे बदलते परिवेश मे अपनी लीडरशिप को सार्थक रखने के लिये अपनी कार्यशैली में बदलाव करना चाहिये. भारतीय जनसंख्या का 60प्रतिशत हिस्सा 10 से 35 वर्ष के युवाओं का है जो वर्तमान परिदृश्य में बेहद महत्वपूर्ण है,युवा वर्ग के बीच मे पुलिस कि कार्यप्रणाली और दक्षता को प्रस्तुत करना भी महत्वपूर्ण चुनौतियों मे से एक है ।
आईजी जी.पी.सिंह ने आगे यह भी कहा कि एक आई पी एस को निम्नलिखित सिद्धान्तों पर खुद को बदलना आवश्यक है जैसे कि सिपाही से लेकर विभाग के समस्त कर्मचारियों एवं अधिनस्त अधिकारी वर्गों के प्रति नज़रिया बदलना,उनके उत्थान और कल्याण के विषय मे कार्य करना जिससे कि वह अपने वरिष्ठों के प्रति कार्य निष्ठा,मेहनत एवं ईमानदारी से करने कि इच्छाशक्ति प्रदर्शित कर सके.उन्होंने कहा कि
एक आई पी एस अधिकारी को फायर फाइटर से लेकर विज़नरी तक,कमांडर से लेकर प्रशिक्षक तक अपनी कार्यकुशलता, निपुणता और दक्षता का परिचय देना आवश्यक होता है.उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान परिदृश्य में कार्यकुशलता के ढोक से लेकर निपुणता तक एक सफल अधिकारी होने का परिचय देना आवश्यक है एवं वर्तमान के परिवर्तित युग मे अधिकारियों को अपनी कार्यशैली मे आधुनिक परिवर्तन कि ओर ढलना चाहिये ।