publicuwatch24.-रायपुर। छत्तीसगढ़ में गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने गन्ने का खरीदी मूल्य 355 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया है। इससे किसानों को अब अपनी उपज पर प्रति क्विंटल 70 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ को गन्ना मूल्य के मामले में देश में पहला स्थान मिलने का दावा किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि नई दर का लाभ केवल आगामी खरीदी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेराई सत्र 2025-26 में पहले ही गन्ना बेच चुके किसानों को भी बढ़ी हुई दर के अनुसार भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा राज्य की चार सहकारी चीनी मिलों से जुड़े 31 हजार से अधिक किसानों को लगभग 51.09 करोड़ रुपये का बोनस वितरित करने की घोषणा भी की गई है।
355 से सीधे 425 रुपये हुआ गन्ने का मूल्य
छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ना उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से खरीदी मूल्य में 70 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। अब तक प्रदेश में गन्ने की खरीदी 355 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही थी, लेकिन नए निर्णय के बाद यह राशि बढ़कर 425 रुपये हो गई है। इस बढ़ोतरी से किसानों को उनकी उपज की मात्रा के अनुसार अतिरिक्त आमदनी होगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई किसान 100 क्विंटल गन्ना बेचता है तो उसे पहले के मुकाबले 7 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। इसी प्रकार 500 क्विंटल गन्ने की बिक्री पर अतिरिक्त राशि 35 हजार रुपये होगी। यह गणना घोषित 70 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी के आधार पर है।
उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा से अधिक घोषित दर
छत्तीसगढ़ में गन्ने की घोषित खरीदी दर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों से अधिक है। उत्तर प्रदेश में अगैती प्रजाति के गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है। वहीं, हरियाणा में 415 रुपये और पंजाब में 416 रुपये प्रति क्विंटल की दर का उल्लेख है। इनकी तुलना में छत्तीसगढ़ की घोषित दर 425 रुपये प्रति क्विंटल है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में गन्ने का भुगतान केंद्र सरकार के उचित एवं लाभकारी मूल्य, चीनी की रिकवरी तथा संबंधित मिलों की व्यवस्था पर निर्भर करता है। केंद्र सरकार ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी के आधार पर 365 रुपये प्रति क्विंटल एफआरपी निर्धारित किया है। इस आधार पर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को गन्ना मूल्य में देश में नंबर वन बताया है।
पहले गन्ना बेच चुके किसानों को भी मिलेगा फायदा
इस फैसले की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता नई दर को पेराई सत्र 2025-26 से लागू करना है। इसका मतलब यह है कि जिन किसानों ने बढ़ोतरी की घोषणा से पहले ही संबंधित सत्र में अपनी गन्ने की फसल चीनी मिलों को बेच दी है, वे भी संशोधित दर के लाभ के दायरे में आएंगे। इस निर्णय से ऐसे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पहले निर्धारित मूल्य पर अपनी उपज की आपूर्ति कर चुके हैं। बढ़ी हुई दर के अनुसार देय अंतर राशि उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का स्रोत बनेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मूल्य वृद्धि का लाभ केवल बाद में गन्ना बेचने वाले किसानों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे संबंधित पेराई सत्र के पात्र किसानों तक पहुंचे।
31 हजार से अधिक किसानों को 51.09 करोड़ रुपये का बोनस
गन्ना खरीदी मूल्य में बढ़ोतरी के साथ प्रदेश सरकार ने सहकारी चीनी मिलों से जुड़े किसानों के लिए बोनस की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार, राज्य की चार सहकारी चीनी मिलों से जुड़े 31 हजार से अधिक किसानों को लगभग 51.09 करोड़ रुपये का बोनस वितरित किया जाएगा। यह राशि गन्ना उत्पादक किसानों के लिए आर्थिक सहायता का अतिरिक्त माध्यम बनेगी। इससे खेती की लागत, कृषि कार्यों की आवश्यकताओं तथा घरेलू खर्चों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में गन्ने की खेती विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां किसानों की आजीविका का एक हिस्सा सहकारी चीनी मिलों को होने वाली आपूर्ति पर निर्भर करता है।
गन्ना उत्पादन में देश में 14वें स्थान पर छत्तीसगढ़
गन्ना उत्पादन के मामले में छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख बड़े उत्पादक राज्यों में शामिल नहीं है, लेकिन प्रदेश में इस फसल की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। देश में गन्ना उत्पादन के मामले में छत्तीसगढ़ का 14वां स्थान है। राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 18.6 लाख से 20.4 लाख टन गन्ने का उत्पादन होता है। कबीरधाम, सूरजपुर, जगदलपुर क्षेत्र, सरगुजा, दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर में गन्ने की खेती की जाती है। इनमें कबीरधाम, जगदलपुर और सरगुजा को प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों के रूप में उल्लेखित किया गया है। गन्ने की खेती से किसानों के साथ-साथ चीनी मिलों के संचालन और उनसे जुड़े स्थानीय रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को भी सहारा मिलता है।
प्रदेश की चार सहकारी चीनी मिलें गन्ना किसानों का प्रमुख आधार
छत्तीसगढ़ में चार प्रमुख सहकारी शक्कर कारखाने संचालित हैं। इनमें कबीरधाम जिले के कवर्धा स्थित भोरमदेव सहकारी चीनी मिल, सूरजपुर की महामाया सहकारी चीनी मिल, कबीरधाम जिले के पंडरिया स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी चीनी मिल और बालोद जिले की मां दंतेश्वरी मैय्या सहकारी चीनी मिल शामिल हैं। ये सहकारी मिलें किसानों से गन्ना प्राप्त कर चीनी उत्पादन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राज्य सरकार की ओर से घोषित नई खरीदी दर का महत्व इन मिलों से जुड़े किसानों के लिए विशेष रूप से बढ़ जाता है। गन्ने का बेहतर मूल्य मिलने से आने वाले समय में किसान खेती की लागत, उपलब्ध भूमि, सिंचाई व्यवस्था और संभावित लाभ के आधार पर फसल उत्पादन से जुड़े फैसले ले सकेंगे।
मुख्यमंत्री साय बोले—अन्नदाता की खुशहाली ही छत्तीसगढ़ का आधार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल दिलाना और खेती को लाभकारी बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखकर लगातार निर्णय ले रही है। मुख्यमंत्री साय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। खेती-किसानी मजबूत होगी तो गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी और ग्रामीण समृद्धि से प्रदेश के विकास को गति मिलेगी।
बढ़ी हुई कीमत से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकती है मजबूती
गन्ना खरीदी दर में बढ़ोतरी का प्रभाव केवल किसानों की व्यक्तिगत आमदनी तक सीमित नहीं रह सकता। बेहतर मूल्य मिलने पर खेती से प्राप्त आय का उपयोग किसान अगली फसल की तैयारी, कृषि उपकरणों, सिंचाई, खाद-बीज और अन्य आवश्यकताओं के लिए कर सकते हैं। विशेषज्ञ दृष्टिकोण से देखें तो किसी भी फसल का लाभ केवल उसके बिक्री मूल्य पर निर्भर नहीं करता। उत्पादन लागत, श्रम, सिंचाई, परिवहन और प्रति एकड़ पैदावार जैसे कारक भी किसानों की वास्तविक आय तय करते हैं। ऐसे में गन्ने की बढ़ी हुई खरीदी दर किसानों के लिए एक सकारात्मक अवसर है। हालांकि, इसका पूरा आर्थिक लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि खरीदी और अतिरिक्त भुगतान समय पर हों तथा किसानों की उत्पादन लागत नियंत्रण में रहे। छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय प्रदेश में गन्ने की खेती को आर्थिक रूप से अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रति क्विंटल 70 रुपये की बढ़ोतरी, पिछले पेराई सत्र से संशोधित दर का लाभ और 51.09 करोड़ रुपये के घोषित बोनस से हजारों किसान परिवारों को अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है।
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Sunday, October 25
