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    Home » खेल में अपनी प्रतिभा को पहचाने और भविष्य संवारें
    रायपुर

    खेल में अपनी प्रतिभा को पहचाने और भविष्य संवारें

    Publicuwatch AutherBy Publicuwatch AutherAugust 1, 2026No Comments3 Views
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    बस्तर – सरगुजा ओलंपिक सहित राष्ट्रीय खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से निखरी छत्तीसगढ़ के युवा पीढ़ी की पहचान

    publicuwatch24.-रायपुर। एक समय था जब यह माना जाता था कि केवल पढ़ाई-लिखाई ही उज्ज्वल भविष्य और अच्छी नौकरी का मार्ग है। इसी सोच को दर्शाते हुए कहा जाता था- ‘पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे बनोगे खराब।’ लेकिन आज का भारत इस धारणा को पूरी तरह बदल चुका है।
    इसलिए आज के दौर में यह कहना उचित नहीं होगा कि केवल पढ़ाई-लिखाई ही सफलता का एकमात्र मार्ग है। यदि किसी में खेल के प्रति जुनून, अनुशासन और समर्पण है, तो वह खेलों के माध्यम से भी अपने सपनों को साकार कर सकता है। शिक्षा और खेल, दोनों मिलकर व्यक्तित्व का समग्र विकास करते हैं तथा जीवन में सफलता के नए द्वार खोलते हैं।
    खेल केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास, अनुशासन और सफलता की ऐसी पाठशाला है, जहाँ से भविष्य के विजेता तैयार होते हैं। आज खेलों में करियर की असीम संभावनाएँ हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मान, रोजगार, आर्थिक सुरक्षा और वैश्विक पहचान मिल रही है। ऐसे समय में प्रत्येक युवा के लिए आवश्यक है कि वह अपनी खेल प्रतिभा को पहचाने और उसे सही दिशा देकर अपने भविष्य को संवारे।
    हर बच्चे के भीतर कोई न कोई विशेष क्षमता होती है। किसी की गति उसे उत्कृष्ट धावक बनाती है तो किसी की फुर्ती कबड्डी, हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, तीरंदाजी, बैडमिंटन, वॉलीबॉल या अन्य खेलों में सफलता दिला सकती है। यदि प्रतिभा को समय पर प्रशिक्षण और अवसर मिले, तो वही खिलाड़ी प्रदेश और देश का गौरव बनता है।
    खेलों का सबसे बड़ा योगदान यह है कि वे जीवन के महत्वपूर्ण गुणों का विकास करते हैं। अनुशासन, धैर्य, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, समय प्रबंधन और संघर्ष का साहस खेल के मैदान में ही सीखा जाता है। यही गुण आगे चलकर जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की नींव रखते हैं।
    छत्तीसगढ़ में खेलों को नया स्वरूप देने की दिशा में राज्य शासन ने उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने, ग्रामीण और जनजातीय अंचलों के युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने तथा खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए अनेक पहल की जा रही हैं। प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना का विकास, प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार, खेल अकादमियों को सुदृढ़ करना तथा विभिन्न स्तरों पर प्रतियोगिताओं का आयोजन इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इसी के साथ ही इस वर्ष से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय खेलों इंडिया ट्राइबल गेम्स का सफल आयोजन किया गया है।
    विशेष रूप से बस्तर ओलंपिक और सरगुजा ओलंपिक जैसी अभिनव पहल ने खेलों को गाँव-गाँव तक पहुँचाया है। इन आयोजनों ने दूरस्थ वनांचलों और जनजातीय क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया है। परंपरागत खेलों के साथ आधुनिक खेलों को भी बढ़ावा देकर हजारों युवाओं, महिलाओं और बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है। इन प्रतियोगिताओं ने यह साबित किया है कि अवसर मिलने पर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के खिलाड़ी अब राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने की क्षमता रखते हैं।
    इसके साथ ही विद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं, ग्रामीण खेल आयोजनों, प्रतिभा खोज कार्यक्रमों तथा प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को प्रोत्साहन, सम्मान और विभिन्न सुविधाएँ उपलब्ध कराकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
    छत्तीसगढ़ सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य स्तर पर कई पुरस्कार प्रदान करती है। जिसमे गुंडाधुर सम्मान शामिल है। यह छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण के तहत दिया जाने वाला सर्वाेच्च खेल पुरस्कार है। यह पुरस्कार बस्तर के वीर नायक गुंडाधुर की स्मृति में, खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को दिया जाता है। दूसरा महाराज प्रवीरचंद भंजदेव के नाम पर है। यह पुरस्कार विशेष रूप से तीरंदाजी के खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। इसी के साथ छत्तीसगढ़ में खेल प्रोत्साहन योजना भी शुरू की गई है, जिससे युवाओं में खेल का अवसर प्राप्त हो सके।
    छत्तीसगढ़ के कई ऐसे खिलाड़ी, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, जो छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। वर्तमान में ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (ग्लासगो) में महिला 53 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया। अमितेश कुजूर ने राष्ट्रमंडल खेल में बेहतरीन प्रदर्शन किया। इसी प्रकार अन्य खिलाड़ियों ने भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतकर छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।
    आज खेल केवल खिलाड़ी बनने तक सीमित नहीं हैं। खेल प्रशिक्षक, फिटनेस विशेषज्ञ, खेल प्रबंधन, खेल विज्ञान, खेल पत्रकारिता और खेल प्रशासन जैसे अनेक क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए रोजगार और करियर के नए अवसर उपलब्ध हैं। इसलिए खेल को अब केवल शौक नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण के प्रभावी माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए।
    अभिभावकों और शिक्षकों की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की रुचि और क्षमता को पहचानें तथा उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। पढ़ाई और खेल एक-दूसरे के पूरक हैं। स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही उत्कृष्ट शिक्षा और सफल जीवन का आधार बनते हैं।
    आज जब डिजिटल दुनिया बच्चों को मैदान से दूर कर रही है, तब आवश्यकता है कि उन्हें फिर से खेल मैदानों की ओर प्रेरित किया जाए। मैदान में बिताया गया समय केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, सोच और नेतृत्व क्षमता को भी मजबूत बनाता है।
    खेल हमें सिखाते हैं कि हर जीत के पीछे निरंतर अभ्यास, अनुशासन और संघर्ष छिपा होता है। इसलिए अपनी प्रतिभा को पहचानिए, शासन, प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे अवसरों का भरपूर लाभ उठाइए और बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय जैसे आयोजनों को अपने सपनों की उड़ान का मंच बनाइए। आज का खिलाड़ी ही कल का चौंपियन, प्रदेश का गौरव और देश का भविष्य है।

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