publicuwatch24.-रायपुर। अपनी नैसर्गिक संपदाओं और समृद्ध ग्रामीण संस्कृति के लिए पहचानी जाने वाली छत्तीसगढ़ की धरती आज एक नई विकासगाथा लिख रही है। इस बड़े बदलाव की धुरी में है छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जिनकी अगुवाई में ‘मोर गांव–मोर पानी’ महाअभियान जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का एक प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभरा है। यह सरकारी योजना एक ऐसा जनआंदोलन बन कर सामने आया है, जिसमें गाँव-गाँव के ग्रामीण भी बूँद-बूँद सहेजने में प्रशासन के साथ जुड़े हैं।
जल संरक्षण से रखी जा रही विकास की नींव
‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान से जल संरक्षण को एक नई दिशा मिली है। अभी तक प्रदेश भर में 6.60 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्य पूरे किए जा चुके हैं जो इस बात का प्रमाण है कि सरकार की नीति और जनता की भागीदारी का साथ आना एक चमत्कार पैदा कर देती है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप 19.23 लाख घनमीटर से अधिक अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित हुई है, इस प्रयास ने भू-जल स्तर को ऊपर उठाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान की उपलब्धि आँकड़ों के अलावा किसानों के खेतों में हरियाली और गांवों में समृद्धि के रूप में भी दिखाई देता है।अपने कुशल नेतृत्व से जल ही जीवन है के सिद्धांत को प्रदेश की साय सरकार ने धरातल पर साकार कर दिखाया है।
जनभागीदारी बनी अभियान की सबसे बड़ी ताकत
इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता इसकी व्यापक जन जनभागीदारी है। 11,000 से भी ज़्यादा ग्राम पंचायतों की सक्रिय भूमिका ने इसे एक भव्य जनआंदोलन का रूप देने का काम किया है। छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में लोग स्वेच्छा से जुड़कर इस जल संरक्षण के काम में अपना योगदान दे रहे हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का यह मानना है कि जब जनता स्वयं किसी काम के साथ जुड़ती है तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है जिस तरह ‘मोर गांव–मोर पानी’ सरकारी कार्यक्रम होने के साथ ही साथ लोगों ने उसे अपनी जिम्मेदारी बना ली है।
संरचनात्मक विकास से किया जा रहा जल का वैज्ञानिक प्रबंधन
विभिन्न सम्बंधित विभागों और मनरेगा (MGNREGA) के समन्वय से जन-भागीदारी एक साथ तालाब, डबरी, चेक डैम, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सोखता गड्ढों जैसी संरचनाओं का व्यापक निर्माण हुआ है। गाँव में तैयार यह संरचनाएं पानी को रोक कर उसे जमीन में समाहित कर भविष्य के लिए सुरक्षित करती हैं।
इस अभियान को आधुनिकता से जोड़ते हुए इसमें GIS तकनीक और ‘जलदूत ऐप’ का उपयोग किया गया है। खुले कुओं के जल स्तर की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर प्रयास का प्रभाव सही दिशा में हो रहा है।
जागरूकता से बदली जन-जन की सोच
‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान की ख़ासियत यह है कि यह निर्माण लोगों की सोच को बदलने का भी काम काम कर रहा है। 11,000 से ज़्यादा पंचायत भवनों की दीवारों पर भू-जल स्तर लिखना एक अनोखा और अदभुत प्रयोग है इस प्रक्रिया ने लोगों को पानी के महत्व के प्रति जागरूक बना दिया है।
इस महाभियान के लिए 626 क्लस्टरों में आयोजित प्रशिक्षणों के माध्यम से 56 हज़ार से अधिक लोगों को जल प्रबंधन की जानकारी दी गई है। जल बचाना ही भविष्य बचाना है इस संदेश को रैली, दीवार लेखन और जनसंवाद के माध्यम से हर घर तक पहुंचाया गया।
कृषि और आय में वृद्धि का नारा ‘नवा तरिया, आय के जरिया’
इस अभियान से किसान सर्वाधिक लाभान्वित हो रहे हैं। ‘नवा तरिया, आय के जरिया’ जैसी पहल ने सिंचाई की सुविधा को मजबूत बनाने का काम किया है। इस प्रयास से अब किसानों को समय पर पानी और खाद मिल रहा है निश्चित ही इससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि हुई है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने वाली यह पहल किसानों की आय में स्थायी सुधार ला रही है। यह वही समावेशी विकास है जिसकी कल्पना हर देश का हर राज्य करता है।
नेतृत्व की दूरदर्शिता बन रही साय सरकार की पहचान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अभियान को एक जनचेतना के रूप में विकसित किया है। पंचायती राज दिवस पर इसकी शुरुआत की गई जो इस बात का संकेत है कि वे ग्राम स्वराज और स्थानीय भागीदारी को कितना सम्मान और महत्व देते हैं। मुख्यमंत्री की सोच स्पष्ट है यदि गांव मजबूत होंगे तो राज्य और देश दोनों मजबूत होंगे। यही दृष्टिकोण ‘मोर गांव–मोर पानी’ को एक ऐतिहासिक अभियान का रूप देता है।
भविष्य की दिशा तय करेगा जल संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल
आज छत्तीसगढ़ ‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान के माध्यम से देश के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करने की स्थिति में आ गया है। इस मॉडल से इस बात का अंदाज़ा भी मिलता है कि कैसे सीमित संसाधनों में भी जनभागीदारी, तकनीक और प्रभावी नेतृत्व के माध्यम से बड़े परिवर्तन लाए जा सकते हैं। आने वाले समय में ‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान छत्तीसगढ़ के अलावा देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।
जल संरक्षण के अलावा ‘मोर गांव–मोर पानी’ एक विचार भी है। एक ऐसा विचार जो लोगों को जोड़ते हुए उन्हें जागरूक करता है जिससे वे भविष्य के प्रति जल को लेकर जिम्मेदार बने। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में यह नई शुरुआत छत्तीसगढ़ को जल समृद्धि और सतत विकास की ओर अग्रसर कर रही है। इस पहल से अब छत्तीसगढ़ का हर गांव अपने पानी के लिए जागरूक होगा, हर खेत हरा-भरा होगा, हर किसान खुशहाल होगा और हर नागरिक सुरक्षित भविष्य की ओर कदम बढ़ाएगा।उम्मीद है इस अभियान की सफलता, छत्तीसगढ़ की नई पहचान भी बनेगी।
