publicuwatch24.-रायपुर। CM विष्णुदेव साय द्वारा छत्तीसगढ़ के सभी वर्ग के कल्याण के लिए प्रभावी और संवेदनशील पहल की जा रही है। विशेष रूप से श्रमवीरों और भूमिहीन कृषि मजदूरों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित योजनाएं उनके जीवन में व्यापक परिवर्तन ला रही हैं। राज्य सरकार की नीतियों का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम छोर तक विकास का लाभ पहुंचाना है, जिससे हर परिवार आत्मनिर्भर और सशक्त बन सके।
इसी दिशा में दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना भूमिहीन परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर उभरी है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है, जिससे उनकी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं को भी बल मिल रहा है।
कोरबा जिले के ग्राम भुलसीडीह निवासी मनोज खूंटे इस योजना के लाभान्वित हितग्राहियों में से एक हैं। उन्होंने बताया कि पहले उनका जीवन अत्यंत कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा था। भूमिहीन होने के कारण उनके पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं था और वे मजदूरी कार्य पर ही निर्भर थे। सीमित आय के चलते परिवार का भरण-पोषण करना, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। उन्होंने बताया कि चार सदस्यीय परिवार की जिम्मेदारी के बीच कई बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था, लेकिन योजना के तहत मिलने वाली वार्षिक सहायता राशि ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अब वे इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा, घरेलू खर्चों एवं अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में कर रहे हैं, जिससे उन्हें काफी राहत मिली है।
खूंटे ने यह भी बताया कि वे अब केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भविष्य के प्रति भी सजग हुए हैं। वे इस राशि में से कुछ बचत कर स्वयं का छोटा व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं, ताकि स्थायी आय का स्रोत विकसित कर आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इस योजना ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि उनके जीवन में विश्वास और सुरक्षा की भावना भी विकसित की है। अब वे अपने परिवार की देखभाल बेहतर ढंग से कर पा रहे हैं और अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आश्वस्त हैं। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि श्रमवीरों को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर “सशक्त श्रमिक, समृद्ध छत्तीसगढ़” के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
योजना से लाभान्वित हितग्राहियों का कहना है कि उन्हें पहले इस तरह की सहायता की उम्मीद नहीं थी, लेकिन राज्य सरकार की जनकल्याणकारी पहल ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्हें आर्थिक संबल मिला है, बच्चों के भविष्य के प्रति भरोसा बढ़ा है और परिवार को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्राप्त हुआ है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस योजना के अंतर्गत करीब 6 लाख हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं, जिनमें बैगा-गुनिया समुदाय के हितग्राही भी शामिल हैं। योजना का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ नगर पंचायत क्षेत्रों में निवास करने वाले पात्र परिवारों को भी मिल रहा है।
योजना के तहत भूमिहीन कृषि मजदूर, चरवाहा, नाई, धोबी, मोची तथा वनोपज संग्राहक आदि पात्र माने गए हैं। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना आवश्यक है तथा परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर कृषि योग्य भूमि नहीं होनी चाहिए। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना उनके जैसे भूमिहीन मजदूर परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिली है, भविष्य के प्रति विश्वास बढ़ा है और जीवन को नई दिशा मिली है। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमिहीन परिवारों को आत्मविश्वास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का नया आधार भी उपलब्ध करा रही है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का यह एक सशक्त उदाहरण है, जो हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
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Friday, November 6
