स्व-सहायता समूह से मिला संबल, व्यवसाय शुरू कर बच्चों को दिला रहीं बेहतर शिक्षा
publicuwatch24.-रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। प्रदेशभर में हजारों महिलाएं ‘बिहान’ से जुड़कर आजीविका गतिविधियों के माध्यम से सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर हैं।
सरगुजा जिले के सुंदरपुर की श्रीमती संगीता यादव इसकी प्रेरक मिसाल हैं। कभी आर्थिक कठिनाइयों से जूझने वाला उनका परिवार आज स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना चुका है।
आर्थिक चुनौतियों से संघर्ष का सफर
संगीता यादव के पति रूपसाय यादव राजमिस्त्री का कार्य करते हैं। परिवार में चार बच्चों की शिक्षा और दैनिक जरूरतों की जिम्मेदारी सीमित आय में पूरी करना कठिन था। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण परिवार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।
‘बिहान’ से मिली नई राह
आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से संगीता यादव स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्होंने चरणबद्ध तरीके से लगभग एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस वित्तीय सहयोग ने उन्हें स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का अवसर प्रदान किया।
स्वरोजगार से बढ़ी आय
प्राप्त ऋण राशि से उन्होंने अपने घर के समीप परचून दुकान शुरू की। इसके साथ ही चना और अंडा विक्रय का कार्य भी आरंभ किया। उनकी मेहनत और लगन के परिणामस्वरूप व्यवसाय में निरंतर वृद्धि हुई और परिवार की आय का स्थायी स्रोत तैयार हो गया।
शिक्षा से संवर रहा बच्चों का भविष्य
व्यवसाय से होने वाली नियमित आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। अब संगीता अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा रही हैं। उनका कहना है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता ने परिवार को नई दिशा दी है और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने का अवसर प्रदान किया है।
श्रीमती संगीता यादव ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने अपनी सफलता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।
‘बिहान’ योजना के माध्यम से प्रदेश की हजारों महिलाएं स्वरोजगार, लघु उद्यम, कृषि और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी मजबूत आधार प्रदान कर रही है।
