publicuwatch24.-रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायपुर (सिलतरा) स्थित वेदांता पावर प्लांट में बीते 14 अप्रैल को हुए दर्दनाक हादसे ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में पुलिस द्वारा वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज किए जाने के बाद उद्योग जगत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद और जाने-माने उद्योगपति नवीन जिंदल ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए सोशल मीडिया पर अपना विरोध दर्ज कराया है।
जिंदल का तर्क: “क्या सरकारी हादसों में चेयरमैन पर होती है कार्रवाई?”
कुरुक्षेत्र से सांसद और जिंदल स्टील एंड पावर के चेयरमैन नवीन जिंदल ने इंस्टाग्राम के जरिए इस पूरे मामले पर अपनी राय रखी। उनके बचाव के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
दोहरे मापदंड का आरोप: जिंदल ने सवाल उठाया कि जब किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) या भारतीय रेलवे में कोई बड़ा हादसा होता है, तो क्या विभाग के चेयरमैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाती है? उन्होंने मांग की कि जो मानक सरकारी संस्थानों के लिए हैं, वही निजी क्षेत्र पर भी लागू होने चाहिए।
प्रत्यक्ष भूमिका का अभाव: उन्होंने स्पष्ट किया कि अनिल अग्रवाल जैसे वैश्विक स्तर के उद्यमी की पावर प्लांट के दैनिक संचालन (Operations) में कोई सीधी भूमिका नहीं होती। ऐसे में जांच से पहले ही उनका नाम एफआईआर में डालना न्यायसंगत नहीं है।
विकसित भारत का विजन: जिंदल ने कहा कि भारत को 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था और #ViksitBharat बनाने के लिए अनिल अग्रवाल जैसे निवेशकों की आवश्यकता है। यदि निवेशकों का सिस्टम पर भरोसा डगमगाएगा, तो देश के औद्योगिक विकास पर बुरा असर पड़ेगा।
हादसे और राहत कार्य का संक्षिप्त विवरण
वेदांता (बालको) के पावर प्लांट में हुए इस हादसे की विभीषिका और उसके बाद की स्थिति को नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:
विवरण सांख्यिकीय/महत्वपूर्ण जानकारी
हादसे की तिथि 14 अप्रैल, 2026
प्रभावित परिवार लगभग 23 परिवार (जिन्होंने अपनों को खोया या विस्थापित हुए)
नवीन जिंदल की मांग उचित मुआवजा, आजीविका समर्थन और निष्पक्ष जांच
विवाद का मुख्य कारण चेयरमैन अनिल अग्रवाल के विरुद्ध नामजद FIR
उद्योग जगत की चिंताएं और भावी कदम
नवीन जिंदल ने अपनी पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि वह हादसे के पीड़ितों के प्रति पूरी संवेदना रखते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
निष्पक्ष जांच अनिवार्य है: पहले पूरी घटना की तकनीकी जांच होनी चाहिए।
साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई: जिम्मेदारी तय करने के बाद ही कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए, न कि पहले ही शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया जाए।
“छत्तीसगढ़ की यह त्रासदी बेहद पीड़ादायक है। प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा और पूरी तरह से निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। लेकिन किसी भी जांच से पहले अनिल अग्रवाल का नाम FIR में शामिल करना गंभीर सवाल खड़े करता है।” – नवीन जिंदल, सांसद (भाजपा)
