publicuwatch24.-भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल में भिलाई स्टील प्लांट के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं विभाग में पदस्थ सीएमओ डॉक्टर उदय को दर्शक इन दिनों संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की भूमिका में खूब पसंद कर रहे हैं। बॉलीवुड मूवी ‘रमाई’ में डॉ. उदय ने यह भूमिका निभाई है। वहीं उनकी पत्नी और पूर्व मिसेज यूनिवर्स प्रेरणा धाबर्डे इस फिल्म की केंद्रीय भूमिका में है। देशभर में मूवी रिलीज हो चुकी है। शहर के कई सिनेमा हॉल में शो चल रहे हैं। इसे देखने के लिए जन प्रतिनिधियों के साथ लोग पहुंच रहे हैं। पूर्व विधायक अरुण वोरा, दुर्ग महापौर धीरज बाकलीवाल और विधायक रिकेश सेन ने भी फिल्म देखने के बाद धाबर्डे दंपति के अभिनय की तारीफ की है।
डॉक्टर उदय ने इस फिल्म के बारे में बताया कि-बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की विश्व व्यापी छवि के पीछे उनकी पत्नी रमाबाई अंबेडकर का भी हाथ है। सब श्रद्धा और प्यार से उन्हें रमाई कहते हैं, उनका बहुत बड़ा योगदान था। रमाई हिंदी फिल्म में हर स्त्री की त्याग, संघर्ष, बलिदान की कहानी दिखाने की कोशिश की है, जो पर्दे के पीछे रहकर अपने पति, परिवार समाज और देश के लिए करती है।
इस फिल्म की प्रोड्यूसर कृष्ण चौहान है। फिल्म को प्रेजेंट प्रेरणा यूनिवर्सल फिल्म ने किया है। शूटिंग भिलाई और मुंबई में हुई है और अधिकांश कलाकार छत्तीसगढ़ के हैं। फिल्म में शाहू महाराज बड़ौदा नरेश के भूमिका प्रसिद्ध कलाकार रजा मुराद ने निभाई है, जिनके शानदार अभिनय और बुलंद आवाज के सभी दीवाने हैं। बाबा साहेब के बड़े भाई की भूमिका में भिलाई के ही नत्था उर्फ ओमकार दास मानिकपुरी ने अपने अभिनय के जलवे दिखाए हैं। फिल्म का संगीत बहुत ही कर्म प्रिय है और इसके संगीतकार मुंबई के संगीतकार दिनेश अर्जुन है। फिल्म में बॉलीवुड सिंगर वैशाली माड़े (पिंगा ग पोरी पिंगा फिल्म बाजीराव मस्तानी) तथा सुहासिनी बेलोन्डे (करीब बॉलीवुड फिल्म। चोरी चोरी नजरे मिली), दिनेश अर्जुन और डॉक्टर नेहा ने अपने मधुर आवाज से इस फिल्म में जान डाल दी है।
इस फिल्म के मुख्य किरदार रमाबाई आंबेडकर माता रमाई का किरदार पूर्व मिसेज यूनिवर्स का खिताब 2003 में यूरोप से जीत कर आई भिलाई की गौरव प्रेरणा धाबर्डे ने निभाया है। इस किरदार में अपने इमोशन और सादगी भरे अभिनय से दर्शकों की आंखों में आंसू लाने में कामयाब रही है। फिल्म बहुत ही शिक्षाप्रद, सामाजिक और प्रेरणादायक है। यह हर घर, समाज ,देश- विदेश की सामान्य नारी की कहानी है,उसके संघर्ष की कहानी है। रमाई अपने चार बच्चों को पैसे और इलाज के अभाव में खो देती है और जब अच्छी आर्थिक स्थिति होती है और उसके पास सोने के गहने होते हैं तो उसे भी वह बच्चों के आश्रम में बच्चों के भूखा देखकर दान में दे देती है।
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Saturday, May 2
