रायपुर । राजधानी की बिजली व्यवस्था पुराने जर्जर ट्रांसफार्मरों के भरोसे है। यहां के बहुत से ट्रांसफार्मर मध्यप्रदेश के जमाने के हैं, जो झटके दे रहे हैं। बिजली विभाग इन्हें बदल नहीं पाया है। ज्यादातर ट्रांसफार्मर जर्जर होने की वजह से अधिक लोड नहीं झेल पा रहे हैं। इनसे तेल का रिसाव होते रहता है। बिजली का लोड बढ़ते ही ज्यादातर ट्रांसफार्मर फेल हो जाते हैं। शहर के प्रमुख मोहल्ले तात्यापारा, पुरानी बस्ती, गुढ़ियारी, सदर बाजार आदि जगहों पर पुराने ट्रांसफार्मर ही लगे हैं। गर्मी बढ़ने या बारिश के दौरान ट्रांसफार्मर जलने की शिकायत आती है।
कुलमिलाकर यहां लगे ट्रांसफार्मर भगवान भरोसे हैं। बिजली विभाग के अधिकारी का कहना है कि ट्रांसफार्मर पुराने हैं, लेकिन किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है। सूत्र बताते हैं कि गर्मी में ट्रांसफार्मर के जलने की मुख्य वजह मेंटेनेंस में कमी और फ्यूज वायर का नहीं होना है।
अधिकतर ट्रांसफार्मर में फ्यूज वायर की जगह तार बांध दिए गए हैं, जिससे ट्रिप होते ही ट्रांसफार्मर जल जाते हैं। अगर फ्यूज वायर बांधा जाए तो फ्यूज उड़ जाएगा, ट्रांसफार्मर पर असर नहीं होगा। ट्रांसफार्मरों में तेल ठीक से नहीं डालने पर भी असर पड़ता है।
गौरतलब है कि राजधानी के नगर निगम क्षेत्र के 17 जोनों में साढ़े सात हजार ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। इनमें से अधिकतर की हालत बेहद नाजुक है। थोड़ी सी तेज हवा चलने पर ही ट्रांसफार्मर उड़ जा रहे हैं। जोन के शिकायत केंद्रों में रोज कम से कम 320 शिकायतें बिजली से संबंधित आ रही हैं।
तेज हवा चलने या बारिश होने पर शिकायतों की संख्या दोगुनी हो जाती है। इनमें सबसे ज्यादा शिकायतें होती हैं ट्रांसफार्मर उड़ने तथा घरों में फ्यूज उड़ने की। अमूमन ये शिकायतें रोज ही दर्ज हो रही हैं। बिजली विभाग सालों पुराने ट्रांसफार्मरों को सुधार कर किसी तरह काम चला रहा है। लेकिन इसका खामियाजा राजधानी की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
500 ट्रांसफार्मर बैकअप में
बिजली विभाग के अधिकारी ने बताया कि ट्रांसफार्मर खराब होने की स्थिति से निपटने के लिए विभाग ने बैकअप में 500 ट्रांसफार्मर रखे हैं। बिजली कंपनी प्रदेश भर में एक साल में सौ करोड़ रुपये मानसून की तैयारी में खर्च कर रही है। इसके बाद भी आम लोगों की परेशानी दूर नहीं कर पा रही है।
400 कर्मचारी तीन शिफ्ट में तै
बिजली विभाग ने समस्या और शिकायतों के निराकरण के लिए 20 गाड़ी तैनात हैं। 400 कर्मचारियों की तीन शिफ्टों में इन गाड़ियों में तैनात किया गया है। बताया गया है कि चौबीस घंटे चार-चार लोगों की टीम गाड़ियों के साथ ड्यूटी करती है। शिकायत मिलने के बाद सामान्य तौर पर चार घंटे के भीतर शिकायत दूर करने का दावा बिजली विभाग कर रहा है।
ट्रांसफार्मर की 25 साल की अवधि
बिजली विभाग के अधिकारी ने बताया कि एक ट्रांसफार्मर की अवधि 25 साल की होती है। बहुत से ट्रांसफार्मर ने यह अवधि पार कर ली है और बहुतों को 20 साल से अधिक हो गया है। ट्रांसफार्मर जब तक फेल नहीं होता, विभाग उनको बदलने की जहमत नहीं उठाता है।
– ट्रांसफार्मर खराब होते हैं तो बदल दिए जाते हैं, यदि कहीं ज्यादा पुराने ट्रांसफार्मर लगे हैं तो मैं उसे दिखवाता हूं। -जेएस नेताम, ईडी छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी