रायपुर । जिस छत्तीसगढ़ मॉडल का कांग्रेस देश भर में प्रचार कर रही है, उसकी जमीनी हकीकत राज्य के गंभीर आर्थिक संकट की ओर बढ़ने की कहानी बयां कर रहे हैं। इससे उबरने के लिए सरकार कर्ज पर कर्ज ले रही है। हालात यह है कि सामाजिक पेंशन योजनाओं में भी भुगतान रुका हुआ है।
10 हजार करोड़ से अधिक की कर्ज माफी और 2500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 8700 करोड़ के धान खरीद के आर्थिक बोझ से छत्तीसगढ़ की वित्तीय स्थिति डगमगा गई है। इससे उबरने के लिए सरकार ने पहले पूरे राज्य में निर्माण कार्यों पर रोक लगाया। कहा गया कि पूर्ववर्ती सरकार ने चुनावी फायदे और कमीशनखोरी के लिए आनन- फानन में टेंडर किया था। इसके बाद सरकार ने शुरुआती 99 दिनों में ही बांड गिरवी रखकर करीब 10 हजार 400 करोड़ का कर्ज लिया।… और अब सरकार ने सीधी भर्ती वाले पदों पर नियुक्ति से रोक लगा दी है।
इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि भाजपा अपने चहेतों को रेवड़ी की तरह नौकरी बांट रही थी, उस पर लगाम कसने के लिए यह फैसला किया गया है। इस सियासी दांव-पेच के उलट अर्थशास्त्री इन फैसलों की वजह खराब वित्तीय स्थिति बता रहे हैं।
अभी और कर्ज लेगी सरकार
राज्य सरकार रिर्जव बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से प्रतिभूति (बांड) बेचकर लगातार कर्ज ले रही है। जनवरी से अब तक 10 हजार 400 करोड़ का कर्ज हो चुका है। 26 मार्च के बाद प्रतिभूति नहीं बेचा है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार सरकार अभी और बांड बेचेगी, लेकिन वित्तीय वर्ष का पहला महीना और चुनावी माहौल होने के कारण सरकार ने अप्रैल में कर्ज नहीं लिया है। मई से फिर सरकार बांड बचेगी।
एक तरफ रोजगार का वादा दूसरी तरफ रोक
छत्तीसगढ़ की सत्ता में आई कांग्रेस ने राज्य में रोजगार आयोग की स्थापना का वादा किया है। सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले कॉलेजों के लिए प्रोफेसर समेत कुछ और पदों पर भर्ती की घोषणा भी की, लेकिन अभी इनमें से ज्यादातर की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई है। उधर, लोकसभा चुनाव के लिए जारी घोषणा पत्र में भी पार्टी ने 22 रिक्त पड़े सरकारी पदों को भरने का वादा किया है।
रोज 105 करोड़ रुपए की औसत से लिया कर्ज
राज्य में नई सरकार का शपथ ग्रहण 17 दिसंबर 2018 को हुआ था। शुरुआती 99 दिनों में सरकार ने 10400 करोड़ का कर्ज लिया है। यानी सरकार रोज औसत 105 करोड़ का कर्ज, जबकि इस वर्ष लोकसभा चुनाव शुरू होने के पहले तक 26 मार्च तक 85 दिनों के हिसाब से देखा जाए तो यह आंकड़ा 122 करोड़ का है।
सरकार पर बढ़ा आर्थिक बोझ – अर्थशास्त्री
अर्थशास्त्री प्रो. जेएल भारद्वाज कहते हैं कि निश्चित रूप से सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। कर्ज माफी और धान खरीद के लिए सरकार ने बड़ा कर्ज लिया है। सरकार के पास अभी पैसा नहीं है क्योंकि वित्तीय वर्ष की यह शुस्र्आत है। स्वभाविक रूप से इसका असर पड़ेगा।
कांग्रेस का राष्ट्रीय चरित्र उजागर – भाजपा
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव भर्ती पर रोक राज्य के शिक्षित बेरोजगारों के साथ धोखा है। चुनाव से पहले कांग्रेस ने बड़े-बड़े वादे किए थे। अब लोकसभा चुनाव का मतदान हो गया है। कांग्रेस का हित सध गया है और अब कांग्रेस अपने मूल राष्ट्रीय चरित्र पर लौट आई है। लेकिन राज्य के युवा बेरोजगारों को चिंत करने की जस्र्रत नहीं है, भाजपा उनके साथ खड़ी है।
आरएसएस और भाजपा फैला रही भ्रम – कांग्रेस
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि आरएसएस और भाजपा भ्रम फैला रही है। यह पूर्ववर्ती रमन सरकार का आदेश है, जिसे एक साल तक जारी रखा जाएगा। रमन सरकार सरकारी पद रेवड़ी की तरह नौकरी बांटी थी। अब कांग्रेस सरकार नौकरियों में केवल छत्तीसगढ़ी युवाओं को प्राथमिकता देगी, इसलिए आदेश जारी किया गया है।
बेरोजगारी भत्ता, नियमितीकरण समेत कई वादे अभी अधूरे
कांग्रेस ने चुनाव से पहले कांग्रेस ने बेरोजगारों को हर महीने 25 सौ स्र्पये बेरोजगारी भत्ता देने, संविदा कर्मियों को नियमित करने और सामाजिक सुरक्षा योजना के पेंशनों को भी बढ़ाने का वादा किया था। संविदा कर्मी अपनी मांग लेकर मुख्यमंत्री से भी मिले, लेकिन उन्होंने कर्ज माफी का हवाला देते हुए अगले वित्तीय वर्ष में विचार करने का भरोसा दिला कर लौटा दिया।
60 हजार करोड़ कर्ज
सरकार 2014-15 से जनवरी 2018 तक रिजर्व बैंक से 18350 करोड़ का कर्ज ले चुकी है। 2014 में चार किस्तों में 2200, 2015 में 6 किस्तों में 5000 करोड, 2016 में 3 किस्तों में 1850 करोड़ व 2017 में पांच किस्तों में 7200 करोड़ लिए गए। वहीं 2018 में करीब 2200 करोड़ से अधिक का कर्ज लिया गया है। 2019 के शुस्र्आती तीन महीनों में 10400 करोड़ का कर्ज ले चुकी है।
धान बोनस और स्मार्ट फोन के लिए भी कर्ज
नवंबर में सत्ता से बाहर होने से पहले भाजपा सरकार ने लगभग तीन हजार करोड़ का कर्ज ले चुकी थी। इसका उपयोग धान पर बोनस, मुफ्त में मोबाइल जैसी योजनाओं में किया गया।
राज्य की कांग्रेस सरकार ने इस तरह लिया कर्ज
तारीख कर्ज की राशि ब्याज दर अवधि (वर्ष)
01 जनवरी 2000 7.94 04
15 जनवरी 1500 7.64 02
05 फरवरी 1000 8.4 06
12 फरवरी 1000 7.93 05
26 फरवरी 1000 8.18 06
05 मार्च 750 7.48 03
12 मार्च 750 7.43 03
19 मार्च 500 7.68 05
19 मार्च 700 8.04 07
26 मार्च 500 7.69 05
26 मार्च 700 7.57 07
(नोट- राशि करोड़ रुपए में)