रायपुर। कोरबा लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इस सीट से उनकी पत्नी ज्योत्सना महंत कांग्रेस की प्रत्याशी रहीं। इनका मुकाबला भाजपा के ज्योतिनंद दुबे से था। कांग्रेस को मरवाही, पाली-तानाखार और कटघोरा विधानसभा क्षेत्र से बढ़त की उम्मीद है, क्योंकि इन तीनों सीट को ही महंत और उनके करीबी विधायक जयसिंह अग्रवाल ने फोकस किया था।
वहीं, कोरबा में मोदी के प्रभाव के कारण भाजपा को बढ़त की आस है। रामपुर भाजपा का क्षेत्र है, यहां से मतदान का प्रतिशत थोड़ा कम हुआ, लेकिन फिर भी भाजपा को यहां से ज्यादा वोट मिलने की उम्मीद है। ऐसी स्थिति में कोरबा लोकसभा में शामिल सरगुजा संभाग की तीन सीट भरतपुर-सोनहत, मनेंद्रगढ़ और बैकुंठपुर विधानसभा सीटों से हार-तीन का फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।
कोरबा लोकसभा सीट में अभी 73.15 फीसद मतदान हुआ है। 2014 के लोकसभा चुनाव में 73.95 फीसद मतदान हुआ था, तब कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ. महंत थे और उनका मुकाबला भाजपा के डॉ. बंशीलाल महतो से था। महतो ने महंत को हरा दिया था। हालांकि, विधानसभा क्षेत्रवार बात की जाए, तो उस वक्त कोरबा लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाली आठ विधानसभा सीटों में से चार कांग्रेस और चार भाजपा के कब्जे में थी।
2013 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले में 2014 के लोकसभा चुनाव में हर विधानसभा क्षेत्र में एक से चार फीसद तक वोट कम पड़ा था। लोकसभा चुनाव में मतदान गिरने का नुकसान कांग्रेस को हुआ था, क्योंकि महंत को सांसद की कुर्सी गंवानी पड़ी थी। कोरबा लोकसभा क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में 2013 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले में 2018 के विधानसभा चुनाव में चार फीसद ज्यादा मतदान हुआ।
विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत बढ़ने का सीधा फायदा कांग्रेस को हुआ था। आठ में से छह विधानसभा सीट भरतपुर-सोनहत, मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर, कोरबा, कटघोरा व पाली-तानाखार पर कांग्रेस का कब्जा हो गया, जबकि केवल एक सीट रामपुर भाजपा और एक सीट मरवाही जकांछ की झोली जा पाई। भाजपा को तीन सीटों का नुकसान उठाना पड़ा।
इस आधार पर बात की जाए, तो यह कांग्रेस कोरबा लोकसभा क्षेत्र में काफी मजबूत मानी जा रही थी। उसके बाद भी कांग्रेस ने प्रत्याशी तय करने में काफी सोच-विचार किया। पहले तो महंत को उतारने का विचार हुआ, लेकिन महंत ने ही पत्नी का नाम आगे बढ़ा दिया। जिस तरह से इस लोकसभा क्षेत्र में मतदान हुआ है, उससे दोनों खेमा चिंतित है।
11 बजे के बाद ज्यादा निकले मतदाता
कोरबा लोकसभा क्षेत्र में 2014 में जो मतदान का ट्रेंड था, अभी 2019 में भी लगभग वही ट्रेंड रहा। मतदान शुरू होने के बाद पहले दो घंटे में 11 फीसद ही वोट पड़ पाया था। मतलब, सुबह मतदान की रफ्तार कुछ धीमी रही। नौ बजे के बाद कुछ तेजी आई, लेकिन फिर भी मतदान का प्रतिशत 23 फीसद ही पहुंच पाया।
11 बजे के बाद पोलिंग बूथों में लाइन लंबी हुई। कड़ी धूप की परवाह न करते हुए लोग मतदान करने पहुंचे। 11 से दोपहर एक बजे के बीच 16 और दोपहर एक बजे से दोपहर तीन बजे के बाद 17 फीसद मतदान बढ़ा। तीन बजे तक मतदान का प्रतिशत 56.23 फीसद पहुंच गया था। तीन बजे के बाद भी अंतिम समय तक मतदान की रफ्तार लगभग एक जैसी बनी रही।