रायपुर । पूर्व मुख्यमंत्री डॉ। रमन सिंह के दामाद, डीकेएस सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के पूर्व अधीक्षक और 50 करोड़ रुपये की गड़बड़ियों के आरोपी डॉ। पुनीत गुप्ता कहां हैं, इस सवाल का पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है। पुलिस ने उन्हें 29 मार्च को पेश होने कहा था, लेकिन वे नहीं आए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें फरार घोषित कर दिया। पांच अप्रैल को लुकआउट नोटिस भी जारी कर दिया गया है। मगर पुलिस के हाथ अभी तक तो खाली हैं।
पुलिस ने अभी तक कॉल डिटेल तक नहीं निकाला है। क्या इस प्रकरण में राजनीति है? जबकि यह सीधे-सीधे पुलिस की जांच में सरकारी संपत्ति, सरकारी पैसा व अधीक्षक रहते हुए पद के दुरुपयोग का मामला साबित हो चुका है। सूत्र की मानें तो वे छत्तीसगढ़ में ही छिपे हैं। जानकारी तो यहां तक है कि वे अपने परिजनों के संपर्क में भी हैं।
दूसरी तरफ डीकेएस प्रबंधन, डॉ। गुप्ता के कार्यकाल में हुए सभी कार्यों की समीक्षा कर रहा है। अतिरेक में हुई भर्तियां, आउटसोर्सिंग में स्टाफ की संख्या को कम कर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में जुटी हुई है।
डॉ. गुप्ता के पास तीन सरकारी वाहन थे, बावजूद उन्होंने एक गाड़ी किराए पर ले रखी थी। इस गाड़ी का कहीं कोई पता नहीं है। ट्रेवल एंजेसी के संचालक ने डीकेएस प्रबंधन से संपर्क किया, तो कह दिया गया कि गाड़ी नहीं है। वहीं ट्रेवल एंजेसी से अनबुंध ही खत्म कर दिया गया है। बड़ा सवाल यह है कि गाड़ी कहा हैं। इस एक गाड़ी के एवज में हर महीने 49500 रु। किराया दिया जाता था।
एयरपोर्ट प्रबंधन से मिली जानकारी पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी करने की बात कही है, लेकिन वह दिल्ली-मुंबई तो छोड़िए रायपुर एयरपोर्ट ही नहीं पहुंचा है।डॉ। गुप्ता विदेश नहीं भागे हैं। उनका पासपोर्ट भी अब तक जब्त सीज नहीं हुआ है। पुलिस एक बार डॉ। गुप्ता के घर, क्लीनिक गई लेकिन दोबारा नहीं। सवाल पुलिस की जांच पर इसलिए भी उठ रहे हैं कि अभी तक डॉ। गुप्ता के परिजनों से किसी भी संबंध में कोई भी पूछताछ नहीं की गई है।
लुकआऊट नोटिस जारी कर दिया गया है, सभी एयरपोर्ट को कॉपी भी भेज दी गई है। तलाश जारी है।हमारी की जांच पूरी हो चुकी है। सरकारी संपत्ति का दोहन, पद का दुरुपयोग के पुख्ता सबूत हमारे पास मौजूद हैं। समय रहते केस डायरी कोर्ट में पेश करेंगे।