नई दिल्ली। दिवाली पर पटाखों से निकलने वाला धुआं सिर्फ आंखों में जलन या सांस लेने में परेशानी ही नहीं पैदा करता, बल्कि फेफड़ों की सेहत पर भी गंभीर असर डाल सकता है. खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या सीओपीडी जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह धुआं खतरनाक साबित हो सकता है. ज्यादा धुआं फेफड़ों तक पहुंचने से खांसी, बलगम और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ऐसे में दिवाली के दौरान फेफड़ों को सुरक्षित रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसके बारे में अमृता अस्पताल फरीदाबाद के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर सौरव आहूजा ने
पटाखों का धुआं फेफड़ों को कैसे पहुंचाता है नुकसान?
डॉक्टर सौरव आहूजा बताते हैं कि दिवाली पर पटाखे जलाने से काफी मात्रा में धुआं पैदा होता है. जब यह धुआं सांस की नलियों में पहुंचता है, तो उनमें जलन और परेशानी हो सकती है. इसके कारण खांसी, बलगम आने और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि कोई व्यक्ति कितनी मात्रा में धुआं अपने अंदर ले रहा है. अगर कोई व्यक्ति पटाखों के बिल्कुल पास खड़ा होकर धुआं सांस के जरिए अंदर लेता है, तो परेशानी बढ़ने की आशंका रहती है.
बच्चों के विकसित होते फेफड़ों पर पड़ता है असर
डॉक्टर सौरभ बताते हैं कि आज की पीढ़ी के बच्चे प्रदूषित वातावरण में बड़े हो रहे हैं. यही वजह है कि उनमें अस्थमा, सांस लेने में परेशानी और बार-बार निमोनिया जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. दिवाली पर प्रदूषण का स्तर अचानक काफी बढ़ जाता है. ऐसे में अगर छोटे बच्चे ज्यादा मात्रा में पटाखों का धुआं अंदर लेते हैं, तो इसका असर सिर्फ उसी रात तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके विकसित हो रहे फेफड़ों की वृद्धि पर भी पड़ सकता है.इसलिए माता-पिता को बच्चों को धुएं से दूर रखना चाहिए.
बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए खतरा
डॉक्टर सौरव बताते हैं कि जिन बुजुर्गों के फेफड़े कमजोर हैं या जो पहले से अस्थमा और सीओपीडी जैसी बीमारियों से परेशान हैं, उनके लिए प्रदूषण काफी नुकसानदायक हो सकता है. प्रदूषण इन बीमारियों को बढ़ाने का एक बड़ा कारण है. धुएं के संपर्क में आने से नियंत्रित अस्थमा या सीओपीडी भी बिगड़ सकती है. कई बार मरीजों को अगले दिन अस्पताल की ओपीडी में दिखाना पड़ता है, जबकि कुछ लोगों को एक-दो दिन के अंदर इमरजेंसी तक पहुंचना पड़ सकता है.
घर में धुआं आने पर अपनाएं ये सावधानियां
डॉक्टर सौरव बताते हैं कि दिवाली की रात घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने चाहिए. इसके बावजूद अगर धुआं अंदर आ रहा है, तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है. घर में इंडोर पौधे रखना भी फायदेमंद माना जाता है. अगर कमरे में धुआं जमा हो जाए, तो कुछ देर के लिए एग्जॉस्ट चलाकर उसे बाहर निकालने की कोशिश करें. इसके अलावा जब तक घर में धुएं का असर बना रहे, तब तक मास्क पहनना चाहिए. खासकर उस समय जब बाहर बड़ी संख्या में पटाखे जलाए जा रहे हों.
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Thursday, November 5
