नई दिल्ली। भारतीय फुटबॉल में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली (SC Delhi) के मुख्य कोच टोमाज़ चोर्ज़ ने क्लब के भविष्य को लेकर अपनी महत्वाकांक्षी योजनाएं साझा की हैं। उनका मानना है कि किसी फुटबॉल क्लब की असली ताकत सिर्फ मैदान पर मिलने वाली जीत और ट्रॉफियों से नहीं होती, बल्कि उसकी पहचान शहर के लोगों, स्थानीय समुदाय और प्रशंसकों के साथ बने रिश्तों से होती है। कोच चोर्ज़ चाहते हैं कि SC Delhi ऐसा क्लब बने, जिससे दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों, संस्कृतियों और समुदायों के लोग खुद को जोड़ सकें। उनके मुताबिक, क्लब को केवल एक फुटबॉल टीम के रूप में नहीं, बल्कि शहर की साझा पहचान के रूप में विकसित करना जरूरी है।टोमाज़ चोर्ज़ का मानना है कि दिल्ली जैसे बड़े और विविधतापूर्ण शहर में फुटबॉल के विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यहां अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले, विभिन्न संस्कृतियों से जुड़े और अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग रहते हैं। ऐसे में फुटबॉल एक ऐसा माध्यम बन सकता है, जो इन सभी लोगों को एक साथ जोड़ने का काम करे। उनका उद्देश्य मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करने के साथ-साथ शहर के लोगों के बीच क्लब के प्रति अपनापन और विश्वास पैदा करना है।
शिक्षा शिक्षकों फुटबॉल के जरिए अलग-अलग समुदायों को जोड़ने की कोशिश चोर्ज़ के अनुसार, दिल्ली की सबसे बड़ी खासियत यहां रहने वाले लोगों की विविधता है। शहर में देश के अलग-अलग राज्यों से आए लोग रहते हैं। इसके अलावा विदेशी नागरिकों और विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की भी बड़ी मौजूदगी है। ऐसे में SC Delhi के पास फुटबॉल के जरिए सभी को एक मंच पर लाने का अच्छा अवसर है। वह चाहते हैं कि क्लब की टीम भी दिल्ली की इसी विविधता का प्रतिनिधित्व करे।उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि क्लब एक ऐसा बड़ा परिवार बने, जिसमें अलग-अलग संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों के लोग शामिल हों। फुटबॉल के माध्यम से लोगों के बीच दोस्ती और आपसी समझ बढ़ाई जा सकती है। उनका मानना है कि जब प्रशंसक स्टेडियम में एक साथ अपनी टीम का समर्थन करते हैं, तो उनके बीच एक अलग तरह का जुड़ाव पैदा
मुख्य कोच ने टीम के लिए प्रशंसकों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि मैदान पर खिलाड़ी और कोच जितने जरूरी हैं, उतने ही जरूरी स्टैंड में बैठकर टीम का उत्साह बढ़ाने वाले समर्थक भी हैं। उन्होंने प्रशंसकों को टीम का 12वां खिलाड़ी बताते हुए उम्मीद जताई कि दिल्ली के लोग बड़ी संख्या में स्टेडियम पहुंचकर क्लब का समर्थन करेंगे।चोर्ज़ ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर प्रशंसकों की दिलचस्पी दिखाई देती है। कई लोग टीम के प्रशिक्षण सत्र के दौरान भी नजर आते हैं। कभी-कभी सड़क पर भी प्रशंसक खिलाड़ियों और कोच से मिलते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि लोगों के बीच क्लब को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है।उन्होंने उम्मीद जताई कि मैच केवल खेल प्रतियोगिता बनकर न रहें, बल्कि लोगों के मिलने-जुलने और नए दोस्त बनाने का अवसर भी बनें। उनके मुताबिक, अगर फुटबॉल के कारण अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक-दूसरे के करीब आते हैं, तो यह क्लब की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होगी।
दिल्ली में फुटबॉल संस्कृति को फिर मजबूत करने का लक्ष्य SC Delhi के सामने एक बड़ी चुनौती राजधानी में फुटबॉल के प्रति पुरानी लोकप्रियता को दोबारा मजबूत करने की भी है। दिल्ली में पहले फुटबॉल को लेकर अच्छा माहौल रहा है। यहां अंबेडकर स्टेडियम में कई महत्वपूर्ण मुकाबले आयोजित होते थे। डूरंड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट भी राजधानी में खेले जाते रहे हैं। भारतीय फुटबॉल टीम के मुकाबलों को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते थे।हालांकि, समय के साथ राजधानी में शीर्ष स्तर के फुटबॉल क्लबों की मौजूदगी और प्रशंसकों के बीच जुड़ाव कुछ कमजोर हुआ। अब SC Delhi इस खालीपन को भरने की कोशिश कर रहा है। क्लब प्रबंधन की योजना स्थानीय फुटबॉल अकादमियों, शौकिया खिलाड़ियों और फुटबॉल समुदाय के साथ मिलकर काम करने की है।क्लब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ध्रुव सूद ने भी दिल्ली में फुटबॉल समुदाय को फिर से सक्रिय करने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि क्लब का उद्देश्य केवल मैदान पर मुकाबले खेलना नहीं, बल्कि स्थानीय फुटबॉल व्यवस्था का हिस्सा बनना और अकादमियों के साथ बेहतर संबंध विकसित करना है। क्लब भविष्य में दिल्ली के अधिक से अधिक खिलाड़ियों को अपनी टीम में शामिल करने की दिशा में भी काम करना चाहता है।
सर्वश्रेष्ठ छठी रैंक भारतीय युवा खिलाड़ियों को देना चाहते हैं बड़ा मंच टोमाज़ चोर्ज़ ने भारतीय फुटबॉलरों की प्रतिभा पर भी भरोसा जताया है। उनके मुताबिक, भारतीय खिलाड़ियों में काफी क्षमता है और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। क्लब में मौजूद युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धी माहौल देकर आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।उन्होंने भारतीय फुटबॉल में स्थानीय खिलाड़ियों को अधिक अवसर मिलने को सकारात्मक पहलू बताया। उनका मानना है कि युवा खिलाड़ियों को केवल टीम का हिस्सा बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें मैदान पर अपनी क्षमता साबित करने का मौका भी देना होगा।चोर्ज़ के मुताबिक, SC Delhi को ऐसे मंच के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां युवा खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को निखार सकें और भविष्य में बड़े स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना पूरा कर सकें। इसके लिए क्लब को खिलाड़ियों के विकास में सहयोगी और मार्गदर्शक की भूमिका निभानी होगी। लंबी योजना के साथ आगे बढ़ रहा क्लब SC Delhi का सफर भी भारतीय फुटबॉल में एक नए अध्याय की तरह है। यह क्लब पहले हैदराबाद एफसी के नाम से जाना जाता था। वर्ष 2025 में इसका नाम बदलकर स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली किया गया और क्लब का आधार हैदराबाद से राजधानी में स्थानांतरित हुआ। इस बदलाव के साथ क्लब के सामने नई पहचान बनाने और दिल्ली के फुटबॉल प्रशंसकों का विश्वास जीतने की चुनौती भी आई।टोमाज़ चोर्ज़ के विचारों से स्पष्ट है कि उनकी प्राथमिकता केवल तत्काल परिणाम हासिल करना नहीं, बल्कि एक मजबूत और स्थायी फुटबॉल संस्कृति तैयार करना है। वह चाहते हैं कि आने वाले वर्षों में SC Delhi की पहचान दिल्ली के लोगों के बीच एक ऐसे क्लब के रूप में बने, जिसके साथ शहर का हर वर्ग जुड़ाव महसूस करे।उनके लिए क्लब की सफलता का मतलब सिर्फ मैच जीतना या ट्रॉफी हासिल करना नहीं है। असली सफलता तब होगी, जब बच्चे इस क्लब को देखकर फुटबॉल खेलने के लिए प्रेरित हों, स्थानीय खिलाड़ी इसमें अपना भविष्य देखें और प्रशंसक इसे अपनी टीम मानकर समर्थन करें। यही सोच SC Delhi को राजधानी के फुटबॉल जगत में एक मजबूत और लोकप्रिय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।