केदारनाथ भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। यह ‘चार धाम’ (जिसे भारत का ‘छोटा धाम’ भी कहा जाता है) का हिस्सा है और उत्तराखंड में स्थित है। चार धाम में यमुनोत्री (देवी यमुना को समर्पित) और गंगोत्री (देवी गंगा को समर्पित) भी शामिल हैं – ये दोनों धाम भारत की उन पवित्र नदियों को समर्पित हैं, जिनका उद्गम उत्तराखंड से हुआ है। वहीं, एक धाम भगवान विष्णु के स्वरूप, भगवान बद्री (बद्रीनाथ) को समर्पित है। केदारनाथ धाम यात्रा, जो 22 अप्रैल 2026 को शुरू हुई थी, सर्दियों के मौसम के लिए नवंबर में बंद हो जाएगी। आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
सर्दियों में बंद होगा केदारनाथ (2026) इस साल केदारनाथ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई है। अब दिवाली के बाद, सर्दियों के मौसम के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। 11 नवंबर को (भाई दूज के शुभ अवसर पर) सुबह लगभग 8:30 बजे मंदिर के कपाट बंद हो जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद, भगवान केदारनाथ (भगवान शिव) की ‘पंचमुखी उत्सव मूर्ति’ को एक शोभायात्रा के रूप में ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर ले जाया जाएगा, जहाँ सर्दियों के दौरान उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।
सर्दियों में कपाट बंद होने से पहले दर्शन करें इसलिए, यदि आप दिवाली मनाने के लिए मंदिर जाने की योजना बना रहे हैं, तो 11 नवंबर से पहले पहुँचें। इससे आप भगवान केदारनाथ के दर्शन कर सकेंगे, इससे पहले कि वे अपने शीतकालीन निवास (सर्दियों के आवास) के लिए प्रस्थान करें। ‘पंचमुखी डोली’ क्या है? भगवान केदारनाथ की ‘पंचमुखी डोली’ बाबा केदार की उस पवित्र वार्षिक शोभायात्रा को दर्शाती है, जो उन्हें ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर (उनके शीतकालीन निवास) से केदारनाथ धाम तक ले जाती है। इस डोली में भगवान केदारनाथ की ‘पंचमुखी’ (पाँच मुख वाली) मूर्ति होती है, जिसे शीतकालीन निवास से ऊँचाई पर स्थित मंदिर तक ले जाया जाता है। भगवान केदारनाथ की यह पंचमुखी मूर्ति भगवान शिव के पाँच रूपों का प्रतीक है। इस शोभायात्रा में कई दिन लगते हैं, जिसमें पारंपरिक संगीत और वैदिक मंत्रोच्चार होते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी इस यात्रा में शामिल होते हैं और पैदल चलकर मूर्ति के साथ चलते हैं।
