publicuwatch24.-कोरिया। कोरिया जिले के वनांचल जनपद सोनहत के ग्राम पंचायत बोड़ार में स्व सहायता समूह की दो दीदियों ने अपनी कर्मठता से गांव में स्वच्छता की अलख जगा दी है। ग्राम विक्रमपुर में रहने वाली श्रीमती पूनम और श्रीमती जयकुंवर द्वारा बीते वर्ष से निरंतर समर्पण भाव से किए जा रहे स्वच्छता कार्य से पूरे गांव में सामूहिक अनुशासन और स्वच्छता के प्रति जागरूकता की समझ विकसित हुई है। अब यह गांव पहले से ज्यादा बेहतर और स्वच्छता से पूर्ण हैं। इस अभिनव पहल से गांव में वातावरण की शुद्धता के साथ प्रदूषण का खतरा भी नगण्य हो गया है।
पहले संकोच फिर मिसाल
स्वच्छ भारत मिषन ग्रामीण के तहत गांव में कचरे का प्रबंधन करने के लिए घर घर कचरा कलेक्षन का कार्य आरंभ किया जाना था। ऐसे मे समूह से जुड़ी हुई कई महिलाओं ने पारिवारिक संकोच के कारण इस कार्य से अपने आप को अलग कर लिया। ऐसे समय में गांव की पूनम और जयकुंवर ने गांव में स्वच्छता के लिए कार्य करने पर सहमति प्रदान की। इस कार्य को लेकर उनको अलग अलग तरह से बातें भी सुनने को मिलीं। लेकिन अपने इरादे पर अटल रहते हुए दोनों सखियों ने इस गंभीर कार्य की जिम्मेदारी उठाई। आज जबकि पूरा गांव स्वच्छता का अनुषासन निभा रहा है तब पूरे गांव में सिर्फ इनके कर्मठता और समर्पण पर बात होती है।
बोड़ार में स्वच्छता पर कार्य
स्वच्छ भारत मिषन के अंतर्गत ग्राम पंचायत बोड़ार को ओडीएफ गांव घोषित किया जा चुका है। अब यहां पर नियमित तौर पर गांव में घर घर कचरा कलेक्षन का कार्य स्वच्छता दीदियों के माध्यम से कराया जा रहा है। गांव में हर तीसरे दिन हर मोहल्ले में जाकर यह दीदियां अपनी कचरा गाड़ी में कचरे का संग्रहण करती हैं और उसे ग्राम पंचायत के बाहर बने कचरा संग्रहण केंद्र में ले जाकर पृथक्करण करती हैं। निरंतर कार्य करने से इनके गांव में अब हर ग्रामीण सड़क पर कचरा फेंकने के बजाए एक नियत स्थान पर एकत्र करते हैं और उसे यह दीदियां सप्ताह मे ंदो बार एकत्र करती हैं।
चुनौतियों के आगे अनुषासन की राह
स्वच्छता का जिम्मा सम्हाल रही श्रीमती पूनम और जयकुंवर ने बताया कि पहले गांव के लोग कचरा देने में भी आना-कानी करते थे। कभी सड़कों पर पहले से कचरा फेंक देते थे। लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी और निरंतर जनसंपर्क कर कचरे का संग्रहण कार्य जारी रखा। गांव के लोगों को धीरे धीरे इनकी मेहनत और उद्देष्य पर भरोसा बढ़ा और अब गांव के लगभग सभी निवासियों और दुकानदारों ने अपने घरों व दुकानों से निकलने वाले कचरे का निष्पादन स्वच्छता दीदियों के हिसाब से करना शुरू कर दिया है।
पूनम और जयकुंवर हैं मानक उदाहरण
गांव में अब यदि स्वच्छता पर बात होती है तो इन दोनों स्वच्छता दीदियों का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। पहले अलग अलग तरह की नकारात्मक बातें सुनने के बाद भी अपने मजबूत इरादे से गांव में स्वच्छता की अलग जगाने वाली श्रीमती पूनम और जयकुंवर को जिला स्तर पर कई आयोजनों में भी सम्मानित किया गया है। गांव में स्वच्छता के प्रति अनुशासन लाने में इनकी महती भूमिका है।
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Monday, September 28
