publicuwatch24.-रायपुर। बस्तर में मलेरिया से जंग अब सिर्फ दवा और जांच की नहीं रही। जंगलों के बीच बसे गांवों में मच्छरदानी की आदत, बुखार पर तुरंत जांच और समय पर इलाज का संदेश धीरे-धीरे लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन रहा है। कभी मलेरिया के लिए संवेदनशील माने जाने वाले इन इलाकों में स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी से लड़ने के साथ-साथ लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव को भी अभियान का केंद्र बनाया है। इसी सामूहिक प्रयास का असर है कि पिछले 10 वर्षों में मलेरिया के मामलों में करीब 83 प्रतिशत की कमी आई है।
बस्तर की इस तस्वीर को बदलने के पीछे वर्षों से चल रही वह मुहिम है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने के साथ लोगों को बीमारी से बचाव का तरीका भी समझाया गया। खासकर संभाग की बड़ी जनजातीय आबादी तक पहुंचने के लिए स्थानीय भाषा, स्थानीय परंपराओं और समुदाय में प्रभाव रखने वाले लोगों को माध्यम बनाया गया। मकसद साफ रहा-मलेरिया से बचाव की बात ऐसी भाषा में कही जाए, जिसे गांव का हर परिवार आसानी से समझ सके और अपनी दिनचर्या में अपना सके।
बैगा-गुनिया भी बने जागरूकता की कड़ी
इसी सोच के साथ बैगा-गुनिया सिरहा सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। गांवों में जिन लोगों की बात समुदाय सहजता से सुनता है, उन्हें मलेरिया से बचाव के उपायों से जोड़ा जा रहा है। इन सम्मेलनों में स्थानीय भाषा और संवाद शैली के जरिए मच्छरदानी के नियमित उपयोग, बुखार होने पर तत्काल जांच और डॉक्टर से उपचार लेने की जरूरत समझाई जाती है।
यह संदेश खास तौर पर इस बात पर केंद्रित है कि बुखार को मामूली समझकर घर पर इंतजार करना भारी पड़ सकता है। समय पर जांच होने से बीमारी की पहचान जल्दी होती है और उपचार शुरू किया जा सकता है। इसी तरह सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल मलेरिया से बचाव का सबसे आसान और प्रभावी उपाय है।
स्वास्थ्य अमला अब मछरदानी के नियमित इस्तेमाल पर भी जोर दे रहा है। मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ता और मितानिनें परिवारों से संपर्क कर यह देख रही हैं कि मच्छरदानी केवल घर में रखी न रहे, बल्कि रात में उसका इस्तेमाल भी हो।
मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में बुखार की निगरानी और जांच की व्यवस्था को भी लगातार मजबूत किया गया है। गांवों में लोगों को यह समझाया जा रहा है कि बुखार आने पर घरेलू उपचार के भरोसे रहने के बजाय स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क करें और जांच कराएं। इस तरह बचाव और उपचार दोनों को समुदाय के व्यवहार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
Trending
- तेंदुए की खाल तस्करी का भंडाफोड़: वन विभाग ने 3 तस्करों को रंगे हाथ पकड़ा, दो बाइक जब्त
- बस्तर में 12 से 15 अगस्त तक तिरंगा यात्रा : डिप्टी सीएम विजय शर्मा बोले- जहां कभी नक्सलियों का खौफ था, वहां अब लहराएगा तिरंगा
- मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों की उच्च स्तरीय बैठक ली, सेवा निवृत्त होने से पहले ही प्रकरण कर निराकृत करें
- जहां मलेरिया था बड़ी चुनौती, वहां बदली तस्वीर, 10 साल में 83 प्रतिशत घटे मामले, अब गांवों में बदल रही लोगों की आदत
- छत्तीसगढ़ को ‘GeM सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवार्ड’, शासकीय खरीदी दोगुनी होकर ₹3,935 करोड़ पहुंची
- रक्षाबंधन से पहले मिला ‘भाई का उपहार’, महतारी वंदन की राशि से सजेगी त्योहार की खुशियां
- देशभक्ति से ओतप्रोत अप्रतिम उत्साह के साथ निकली तिरंगा यात्रा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव हुए शामिल लहराया गया 92 फीट का तिरंगा
- धान बेचने की चिंता थी, समाधान घर की चौखट पर मिला
Tuesday, August 11
