publicuwatch24.-रायपुर। छत्तीसगढ़ में पालक कनेक्ट (पालक-शिक्षक संवाद) अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों का भविष्य संवर रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अनूठी पहल पर शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पालकों (अभिभावकों) और शिक्षकों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है, जिससे बच्चों के शैक्षणिक स्तर और उनके सर्वांगीण विकास में सुधार लाया जा सके।
कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब शिक्षा के क्षेत्र में एक नई और प्रेरक मिसाल पेश कर रहा है। जिला प्रशासन की विशेष पहल और कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे ‘पालक कनेक्ट’ अभियान के जरिए दूरस्थ वनांचल के ड्रॉपआउट बच्चों को पुनरू स्कूल की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
दुर्गम रास्तों को पार कर घर-घर पहुंच रहे शिक्षक
इस अभियान की मुख्य रीढ़ जिले के समर्पित शिक्षक, प्राचार्य और संकुल समन्वयक हैं। ये शिक्षक केवल कक्षाओं तक सीमित न रहकर जंगल, पहाड़ियों और कठिन रास्तों को पार करते हुए सीधे बच्चों के घर-आंगन तक पहुंच रहे हैं। वे अभिभावकों से व्यक्तिगत संवाद कर उन्हें शिक्षा के महत्व से अवगत करा रहे हैं और बच्चों को नियमित स्कूल भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
खेत से लेकर मोबाइल तक शिक्षा से जोड़ने की अनूठी मिसालें
पोटाकेबिन चिंतागुफा की पहलरू शासकीय बालक आवासीय हाई स्कूल (पोटाकेबिन) चिंतागुफा के शिक्षकों ने सुदूर गांव बोदीगुड़ा और टेटरई पहुंचकर परिजनों से संवाद किया। एक छात्र को शिक्षक स्वयं अपने साथ पोटाकेबिन लेकर आए, ताकि उसकी पढ़ाई तुरंत शुरू हो सके। खेतों तक पहुंचे शिक्षक कक्षा 7वीं की एक छात्रा के लंबे समय से अनुपस्थित रहने पर शिक्षक उसे खोजते हुए खेत तक जा पहुंचे और परिजनों से बेटी की पढ़ाई जारी रखने का आग्रह किया। डिजिटल संपर्क के माध्यम से जिन सुदूर क्षेत्रों तक सीधे पहुंचना संभव नहीं हो सका, वहां शिक्षकों ने मोबाइल के माध्यम से अभिभावकों से संपर्क साधकर बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई।
कई गांवों में दिखे सकारात्मक परिणाम
पालक कनेक्ट अभियान के तहत जिले भर से उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। हाई स्कूल पाकेला के शिक्षकों ने पेदापारा पहुंचकर छात्र कृष्णा नाग, गणेश, सुमन और मोहित के परिजनों को नियमित पढ़ाई के लिए सहमत किया। वहीं आदगुड़ा की शाला त्यागी बालिका ज्योति सोड़ी का निकटतम स्कूल में पुनरू दाखिला कराया गया। भेज्जी क्षेत्र के माड़वी हिड़मा (कक्षा 8वीं), माड़वी जोगा (कक्षा 7वीं) और माड़वी संदीप (कक्षा 9वीं) की स्कूल वापसी कराई गई। रेगडगट्टा, गेडापाड़, इंजरम, मैलासुर और पालाचलमा क्षेत्रों में व्यापक मोबाइल संपर्क अभियान चलाकर बच्चों को नियमित स्कूल भेजने का आश्वासन प्राप्त किया गया।
भय के माहौल की जगह अब बच्चों के हाथों में किताबें
जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वनांचल का कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। संवेदनशील प्रशासन, समर्पित शिक्षकों और जागरूक अभिभावकों के त्रिकोणीय प्रयास ने सुकमा की तस्वीर बदल दी है। जिस क्षेत्र में कभी भय और अनिश्चितता का माहौल हुआ करता था, वहां अब बच्चों के हाथों में किताबें, कॉपियां और उज्ज्वल भविष्य के नए सपने दिखाई दे रहे हैं।
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Friday, November 6
