publicuwatch24.-रायपुर। महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) के तहत डबरी निर्माण से किसानों की तकदीर बदल रही है। वर्षा आधारित कृषि वाले किसान अब सालभर सब्जी उत्पादन और मछली पालन करके अपनी आय बढ़ा रहे हैं। इससे न सिर्फ भू-जल स्तर सुधरा है, बल्कि गांवों में स्थाई रोजगार मिलने लगा है। बारिश पर निर्भर किसानों को डबरी से सालभर सिंचाई के लिए पानी मिलता है, जिससे वे धान के साथ-साथ गेहूं, अरहर और मौसमी सब्जियों की बहुफसली खेती कर रहे हैं।
ग्रामीणों के जीवन में एक क्रांतिकारी और सकारात्मक बदलाव
कभी सिर्फ मानसूनी बारिश के भरोसे रहने वाले बस्तर जिले की खोटलापल ग्राम पंचायत के किसान आज आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहे हैं। जल संवर्धन के जमीनी प्रयासों के तहत गाँव में निर्मित एक डबरी (छोटे तालाब) ने न केवल क्षेत्र के भूजल स्तर को सुधारा है, बल्कि परंपरागत खेती से आगे बढ़कर रबी फसल और मत्स्य पालन के जरिए स्थानीय किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध और सशक्त बना दिया है। महात्मा गांधी नरेगा और जल संवर्धन योजनाओं के तहत हितग्राही सोनधर और मोंगर के खेतों में निर्मित इस डबरी ने सिंचाई के संकट को दूर करने के साथ-साथ ग्रामीणों के जीवन में एक क्रांतिकारी और सकारात्मक बदलाव की नींव रखी है।
रबी फसलों के साथ साग-सब्जियों का होगा उत्पादन
इस जल संरचना के निर्माण से खुश होकर ग्रामीण सोनधर कहते हैं कि यह डबरी जल संकट के स्थायी समाधान के रूप में सहायक होगा, क्योंकि अब इसमें बारिश का पानी एकत्रित होने से सिंचाई के लिए पानी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी और फसलों को सूखा पड़ने के खतरे से पूरी तरह बचाया जा सकेगा। वहीं अब डबरी में पर्याप्त पानी जमा होने से वे रबी सीजन में दूसरी फसलों के साथ-साथ उन्नत साग-भाजी का उत्पादन भी कर पाएंगें जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। खेती में आए इस सुधार के साथ-साथ इस डबरी का बहुआयामी उपयोग अब मछलीपालन के लिए भी ग्रामीण परिवारों द्वारा किया जाएगा और इसी सफलता से उत्साहित होकर हितग्राही सोनधर ने आगामी समय में बतख पालन करने की मंशा भी जाहिर की।
ग्रामीणों को अपने गाँव में ही मिला रोजगार
आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ इस परियोजना ने स्थानीय पर्यावरण और रोजगार को भी व्यापक रूप से प्रभावित किया है और इस जल संरचना के कारण आसपास के कुओं, हैंडपंपों और खेतों की मिट्टी की नमी (वाटर रिचार्जिंग) में भारी सुधार होगा। इसके अलावा, डबरी की खुदाई और निर्माण कार्य के दौरान ग्राम पंचायत के दर्जनों स्थानीय जॉबकार्डधारी ग्रामीण मजदूरों को सीधे उनके अपने गाँव में ही रोजगार मिला, जिसने क्षेत्र से होने वाले पलायन पर एक प्रभावी रोक लगाने का काम किया है।
Trending
- बदला नारायणपुर: 65 गांवों की बदली तकदीर, पुलों और सड़कों ने खत्म किया बरसाती अलगाव, विकास को मिली नई रफ्तार
- पद्मश्री और राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकारों, साहित्यकारों तथा संस्कृति जगत की विभूतियों ने मुक्तकाश मंच से पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई दी भावभीनी श्रद्धांजलि
- जल क्रांति की ओर नारायणपुर : जिला खनिज संस्थान न्यास निधि से निर्मित स्टॉपडैम और चेकडैम बदल रहे किसानों की तकदीर
- छत्तीसगढ़ में ईवी चार्जिंग नेटवर्क को मिलेगा बूस्ट, सरकार लाएगी एकीकृत एप
- खोटलापल ग्राम पंचायत में डबरी निर्माण से बदली ग्रामीणों की तकदीर
- आधुनिक कृषि तकनीकों और समय पर आदान सामग्री से सशक्त बन रहा अन्नदाता
- खामोश दुनिया में गूंजी किलकारी: सरकार की योजना से नन्हीं मासूम को मिली सुनने की नई जिंदगी
- डीएमएफ योजना से किसानों को मिली आधुनिक खेती की सौगात
Wednesday, July 8
