Publicuwatch24.com-जगदलपुर। बस्तर संभाग के दुर्गम इलाकों में शासन ने सभी माओवादी स्मारकों को ध्वस्त कर उनके स्थान पर सुरक्षाबलों के बलिदानियों की प्रतिमाएं और “अमर बलिदानी स्मारक” स्थापित करने का निर्णय लिया है। पंचायत विभाग ने इसके लिए राशि स्वीकृत कर दी है। इसका मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को जवानों की शौर्यगाथा से परिचित कराना और क्षेत्र में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करना है। सुरक्षाबलों द्वारा माओवादियों के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने के बाद अब उन स्थानों पर बलिदानियों की स्मृति में स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन की योजना के अनुसार, बस्तर के विभिन्न गांवों में कुल 1,200 से अधिक बलिदानियों की स्मृति स्मारक बनाए जाएंगे, जो आने वाली पीढ़ियों को जवानों के साहस और बलिदान से परिचित कराएंगे।
इसी कड़ी में सुकमा जिले में दो बड़े स्मारकों का लोकार्पण किया गया है। 6 अप्रैल 2026 को ताड़मेटला (गडगडमेटा) में उस ऐतिहासिक स्थल पर स्मारक का उद्घाटन हुआ, जहां 2010 में 76 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। इसी तरह बुरकापाल (चिंतागुफा) में भी 25 बलिदानियों को समर्पित स्मारक राष्ट्र को सौंपा गया। 24 अप्रैल 2017 को सड़क निर्माण की सुरक्षा में तैनात इन जवानों पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। अब ये स्मारक प्रत्येक बलिदानी की संक्षिप्त जानकारी के साथ उनके पराक्रम की गाथा बयां कर रहे हैं।
बस्तर को 31 मार्च को हथियारबंद माओवादियों से मुक्त घोषित करने के बाद अब गांव-गांव में स्मारकों के निर्माण की तैयारी है। नारायणपुर के ओरछा में उस शिक्षक का भी स्मारक बनाने की तैयारी है, जिसने माओवादियों के डर को दरकिनार कर तिरंगा फहराया था, और बाद में अपनी जान गंवाई। जगदलपुर में “अमर जवान शहीद परिसर” के माध्यम से संभाग के सभी बलिदानी परिवारों को संगठित कर उन्हें सहायता और सम्मान देने की योजना पर कार्य चल रहा है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का कहना है कि ये स्मारक न केवल श्रद्धांजलि स्थल हैं, बल्कि इस बात का प्रमाण भी है, कि बस्तर की धरती से आतंक का अंधेरा छंट चुका है, और अब वहां केवल राष्ट्रभक्ति और विकास का उजाला है। आने वाली पीढ़ियां भी बलिदानियों की शौर्यगाथा को जानेंगी और समझेंगी।
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Tuesday, October 6
