publicuwatch24.-रायपुर l छत्तीसगढ राज्य के बिलासपुर जिले की सांस्कृतिक संस्था ‘लोक श्रृंगार भारती’ के गेड़ी लोक नृत्य दल द्वारा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) व संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के आमंत्रण पर नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला प्रांगण में गेड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। 7 से 13 दिसम्बर तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समारोह में 180 देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रहीं। समारोह में बिलासपुर के गेड़ी नर्तक दल ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति को काफी सराहा गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस गेडी नर्तक दल को बधाई और शुभकामनाएं दीं है l
समारोह का ऐतिहासिक क्षण तब आया जब भारत के महापर्व दीपावली को यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान की गई। इस उपलब्धि में छत्तीसगढ़ के गेड़ी लोक नृत्य दल की प्रस्तुति को विशेष सराहना मिली गेड़ी नृत्य की भावपूर्ण और साहसिक प्रस्तुति से केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत प्रभावित हुए। उन्होंने “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” कहकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
मुख्य गायक एवं नृत्य निर्देशक अनिल गढ़ेवाल के कुशल नेतृत्व में गेड़ी नृत्य दल ने अपने सशक्त, ऊर्जावान एवं रोमांचक प्रदर्शन से अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, विभिन्न राज्यों के कलाकारों सहित 180 देशों के डेलिगेट्स उपस्थित रहे।
मुख्य गायक अनिल गढ़ेवाल द्वारा प्रस्तुत “काट ले हरियर बांसे” गीत ने विदेशी प्रतिनिधियों के मन में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रति गहरी जिज्ञासा उत्पन्न की। वहीं मुख्य मांदल वादक मोहन डोंगरे द्वारा एक ही स्थान पर घूमते हुए मांदल वादन किया। हारमोनियम वादक सौखी लाल कोसले एवं बांसुरी वादक महेश नवरंग की स्वर लहरियों पर विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधि झूम उठे। गेड़ी नर्तकों प्रभात बंजारे, सूरज खांडे, शुभम भार्गव, लक्ष्मी नारायण माण्डले, फूलचंद ओगरे एवं मनोज माण्डले ने साहसिक करतबों से दर्शकों को रोमांचित किया। विशेष रूप से तब, जब एक गेड़ी पर संतुलन बनाते हुए कलाकारों ने मानवीय संरचनाएं बनाईं, पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा।
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा, कौड़ियों व चीनी मिट्टी की मालाएं, पटसन वस्त्र, सिकबंध एवं मयूर पंख धारण कर प्रस्तुत भाव नृत्य ने प्रस्तुति को और भी आकर्षक बना दिया। यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद एन. एनानी सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने गेड़ी नृत्य दल के साथ स्मृति चित्र लिया व छत्तीसगढ़ राज्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान दिलाने के लिए शुभकामनाएं दी।
Trending
- भाजपा की बैठकों में ‘मिशन-2028’ का शंखनाद, स्मृति ईरानी ने कहा- यह सिर्फ चुनावी लक्ष्य नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता, विकास और सुशासन का संकल्प
- 7 वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या पर उभरा संवेदना का ज्वार, कैंडल मार्च निकालकर लोगों ने दी श्रद्धांजलि
- छत्तीसगढ़ दौरे पर स्मृति ईरानी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से की मुलाकात
- दुर्ग में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: बोलेरो पिकअप के गुप्त चेंबर से 4 करोड़ रुपये नकद बरामद
- चक्रवाती तूफान के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना, किसानों को सतर्क रहने की सलाह
- ‘मन की बात’ देश की लोकशक्ति की आराधना और 140 करोड़ देशवासियों से आत्मीय संवाद का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
- झारखंड से अवैध धान परिवहन करते दो पिकअप जब्त
- सिरोही नस्ल के बकरे ने बदली बृजलाल की तकदीर
Monday, October 26
