
पब्लिकयूवाच – रायगढ़ । इस वक़्त कोविड -19 ने पूरी दुनिया की जैसे रफ़्तार ही रोक दी है.भारत में भी कोरोना वायरस को लेकर हाहाकार मचा हुआ है.सारे उद्योग धंधे ,कल कारखाने करीब करीब बंद हो गये हैं.सारे प्रवासी मज़दूर अपने अपने घरों की ओर कूच कर रहे हैं.अचानक 24 मार्च से लॉक डाउन होने और लगातार इसकी अवधि बढ़ने से लोगों के सामने रोज़ी रोटी का मसला खड़ा हो गया है.लोग यही सोच में थे की उनका भरण पोषण आखिर कैसे होगा ।
इन हालात में वनांचल क्षेत्र में बसने वाले आदिवासी परिवारों द्वारा वनोपज संग्रहण कर अपनी ज़िन्दगी में हरियाली महसूस की है ,वनविभाग ने अच्छी कीमत पर 22हज़ार क्विंटल लघु वनोपज क्रय कर इन्हें मालामाल कर दिया है.महज़ माह भर के भीतर धरमजयगढ़ वनमंडल में दस हज़ार से अधिक परिवारों ने विभिन्न प्रकार के वनोपज का संग्रहण किया है.जिन्हें वन विभाग ने लग लगभग 62 लाख का भुगतान कर क्रय किया है ।
लॉक डाउन के समय में जब लोगों के आय के सारे साधन बंद हो चुके हैं ऐसे में वनविभाग की ये पहल वनांचल क्षेत्र में रचने बसने वाले ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है ।
आपको बता दें वनविभाग द्वारा प्रति वर्ष गर्मी के सीजन में चरौठा बीज,हर्रा(गोटा),नागरमोथा,धावई फूल , फूल,महुवाफूल ,इमली ,फूल इमली ,बहेड़ा ,बहेड़ा कचरिया,शहद ,बेल गुदा,करंज बीज ,मेहुल पत्ता ,सवाई घास ,इमली बीज ,काँटा झाड़ू ,भेलवां ,गिलोय ,आदि विभिन्न तरह के वनोपज की खरीदी की जाति है
इन दिनो जंगल में सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए आदिवासी वनोपज संग्रहण कर रहे हैं.इन परिवारों के पास भरपूर काम है ऐसे में धरमजयगढ़ डीएफओ श्रीमती प्रियंका पांडेय व उनकी टीम द्वारा वनांचल क्षेत्र में बसने वाले लोगों को प्रेरित किया जा रहा है ,उनकी हौसला अफ़ज़ाई की जा रही है.ताकि इस सीजन में वे अधिक से अधिक अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें ।
उल्लेखनीय है के महुवा फूल का संग्रहण करआदिवासी परिवारों द्वारा हर साल अतिरिक्त आमदनी कमाई की जाति है.पूर्व में वनविभाग द्वारा समिति के माध्यम से 17 रूपये प्रति किलो की दर से महुवा फूल की खरीदी की जाति थी लेकिन राज्य सरकार ने कोरोना वायरस और लॉक डाउन को देखते हुए आदिवासी परिवारों को अधिक से अधिक लाभ पहुँचाने की गरज़ से अब 17रूपए किलो के बजाय 30रूपए प्रति किलो की दर से महुवा फूल की खरीदी की जा रही है.शासन से आदेश मिलते ही धरमजयगढ़ वनमंडल में महुवा की खरीदी 30 रूपए प्रति किलो के रेट से की जा रही है.जिससे अंचल के ग्रामीणों के जीवन में हरियाली और उनके चेहरे पर मीठी मुस्कान साफ़ झलक रही है.
