
रायपुर । छत्तीसगढ़ में पुलिस कर्मियों को एक बड़ा लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है. पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने के लिए पुलिस विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं। जिलों के एसपी को ये आदेश जारी किया गया है। एसपी को साप्ताहिक अवकाश के लिए रोस्टर बनाना है। सूत्रों के मुताबिक कई जिलों के एसपी ने रोस्टर तैयार भी कर लिया है। कई जगहों पर पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश मिलना शुरू हो गया है।
डीजीपी डीएम अवस्थी ने मीडिया से चर्चा में कहा कि पुलिस कर्मियों को अब साप्ताहिक अवकाश मिलेगा। डीजीपी अवस्थी ने कहा कि पुलिस विभाग ने सप्ताहिक अवकाश के लिए आदेश जारी कर दिया गया है। कई जगहों पर पुलिस कर्मियों को सप्ताहिक अवकाश मिलना शुरू भी हो गया है। जहां नहीं मिल रहा है, वहां भी जल्द ही अवकाश मिलना शुरू हो जाएगा।
पुलिस परिवार ने किया था आंदोलन : बता दें कि जून 2018 में प्रदेशभर के पुलिस परिवारों ने राजधानी रायपुर में आंदोलन किया था। इस आंदोलन में पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश दिए जाने की मांग प्रमुख थी। प्रदेश में दिसंबर 2018 में नई सरकार बनने के बाद पुलिस कर्मियों की मांग को लेकर एक समिति गठित की गई थी। इसमें पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने की मांग को प्रमुखता से मानने की बात कही गई थी। इसके बाद गठित एक समिति ने अपनी रिपोर्ट विभाग को दी। फिर आगे की कवायद शुरू हो गई है।
पुलिस अधिकारी-कर्मचारी महिला व बाल हितैषी बनें: डीजीपी
पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी के विशेष आतिथ्य में पुलिस मुख्यालय द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से बाल हितैषी पुलिस थाना विकसित किए जाने के लिए प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ स्थानीय न्यू सर्किट हाउस स्थित सभाकक्ष में हुआ। पुलिस महानिदेशक अवस्थी ने प्रदेश के सभी जिलों से आए नोडल पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल थाना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक पुलिस अधिकारी-कर्मचारी को बाल हितैषी और महिला हितैषी होना आवश्यक है, तभी हम विश्वसनीय पुलिस की कल्पना साकार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में जब प्रत्येक महिला और प्रत्येक बच्चा पुलिस को अपना मित्र समझने लगेगा तो सम्भवत: इस प्रकार की कार्यशाला का आयोजन की आवश्यकता नहीं होगी। अवस्थी ने यूनिसेफ के अधिकारियों की प्रशंसा करते हुए सुझाव दिया कि इस प्रकार की कार्यशालाओं के आयोजन के स्वरूप में परिवर्तन लाते हुए बच्चों के पालकों के लिए भी शहरी और ग्रामीण स्तरों पर कार्यशाला आयोजित किया जाए, क्योकि बच्चों का अधिकतम समय अपने परिवार के बीच व्यतित होता है। कार्यशाला में विशेष महानिदेशक आरके विज ने प्रदेशभर से आए पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस की भूमिका बच्चों के लिए संवेदनशील है।
ॉपुलिस को अपने थानों में ऐसा खुशनुमा वातावरण तैयार करना चाहिए कि वहां आने वाला कोई भी नागरिक भयभीत न हो। कार्यक्रम में यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्रशांत दास ने पुलिस को बाल हितैषी बनाए जाने के प्रति जागरुकता लाने का सुझाव दिया। कार्यक्रम में उप पुलिस महानिरीक्षक एससी द्विवेदी, नेहा चंपावत, सहायक पुलिस महानिरीक्षक पूजा अग्रवाल सहित पुलिस मुख्यालय और यूनिसेफ के अधिकारी उपस्थित थे।