
रायपुर । छत्तीसगढ़ में धान का कटोरा माने जाने वाले जांजगीर-चांपा और महासमुंद लोकसभा में एक बार फिर कमल खिला है। किसान बहुल दोनों लोकसभा में कांग्रेस कर्जमाफी को मुद्दा बनाकर उतरी थी, लेकिन अधूरी कर्जमाफी के कारण जनता ने कांग्रेस को सिरे से नकार दिया।
शुरुआती स्र्झान में महासमुंद लोकसभा में कांग्रेस उम्मीदवार धनेंद्र साहू ने बढ़त बनाई थी, लेकिन अंतिम परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया। राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें तो जांजगीर और महासमुंद में बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा उठा था, लेकिन महासमुंद में भाजपा के स्थानीय उम्मीदवार चुन्नीलाल साहू तो जांजगीर में बाहरी गुहाराम अजगले को पहली पसंद के स्र्प में चुना। जांजगीर-चांपा और महासमुंद सीटें कृषि प्रधान हैं।
सर्वाधिक चावल का उत्पादन इन्हीं क्षेत्रों में होता है। जांजगीर-चांपा कभी हथकरघा उद्योग विशेष स्र्प से कोसा के कपड़ों के लिए प्रसिद्ध था। पॉवर प्लांटों की वजह से कृषि का रकबा घट रहा है। भाजपा की राजनीति के जानकारों की मानें तो महासमुंद में साहू उम्मीदवारों के कारण वोटों का बंटवारा तो हुआ, लेकिन चुन्न्ीलाल की सामाजिक प्रतिष्ठा को देखते हुए समाज के वोटरों ने उनके पक्ष में मतदान किया।