Tuesday, 02 March 2021

रायपुर। वैदिक परंपरा के प्रचार-प्रसार करने के लिए अब स्कूली को छात्रों को विषय के रूप में पढ़ाई शुरू होगी। इससे 10वीं के छात्र एक विषय के रूप में वेद की पढ़ाई कर सकेंगे, वहीं 12वीं के छात्र वेद संकाय के रूप में पढ़ पाएंगे। 12वीं में कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय के साथ वेद संकाय की पढ़ाई होगी।
फिलहाल यह प्रयास राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयीन शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) की ओर से 2019 सत्र से ट्रायल के रूप में शुरू होगा। पहले चरण में यह 10वीं में शुरू किया जा रहा है। दूसरे चरण में 12वीं में इसे शुरू किया जाएगा। एनआइओएस ने 10वीं के लिए पाठ्यक्रम भी तैयार कर लिया है। इसके सभी विषय संस्कृत भाषा व वेद से जुड़े हैं। हालांकि अभी प्रदेश में कुछ ही संस्कृति स्कूलों में संस्कृत की पढ़ाई हो रही है।
वैदिक ज्ञान को बढ़ावा देने की यह पहल मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शुरू की है। यह अभी पूरा ऑनलाइन ही रहेगा। अगले सत्र यानी 2020 में इसे सीबीएसई भी लागू करेगा। इसके लिए पांच विषय तैयार किए गए हैं। पाठ्यक्रम में संस्कृत पर विशेष जोर होगा। भाषा के रूप में संस्कृत का ही इस्तेमाल बोलचाल में छात्र करेंगे। इसके अलावा चार विषयों में भारतीय दर्शन, वेद अध्ययन, संस्कृत व्याकरण और संस्कृत साहित्य होंगे। इनमें अष्टाध्यायी से लेकर वेद मंत्रों को भी शामिल किया गया है।
इसके सभी विषय संस्कृत भाषा और वेद से जुड़े होंगे। कोर्स विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। खास बात यह है कि वर्तमान में स्कूली शिक्षा में ऐसा कोई कोर्स नहीं था, जिसमें कोई भी वेद और भारतीय वैदिक परंपरा से भी जुड़ सके। इसके तहत अब कोई भी छात्र अन्य संकाय की तरह वेद संकाय लेकर भी पढ़ाई कर सकेंगे। यह भारतीय वैदिक ज्ञान परंपरा संकाय की पढ़ाई ऑनलाइन शुरू की है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में स्थित आरीडोंगरी लौह अयस्क खदान का संचालन सरकार खुद करेगी। छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) के संचालक मंडल ने यह फैसला किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अफसरों ने बताया कि आरीडोंगरी में पाए जाने वाले लौह अयस्क की गिनती उच्च श्रेणी के अयस्कों में की जाती है।
सीएमडी संचालक मंडल ने सरगुजा जिले के मैनपाट तहसील के ग्राम पथराई में बाक्साईट खनिज के खनन व विपणन के संबंध में भी निर्णय लिया। इसी तरह कबीरधाम और सरगुजा जिले स्थित बाक्साईट धारित क्षेत्रों और आरीडोंगरी आयरन ओर ब्लॉक के अन्वेषण के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर किए जाने का निर्णय लिया गया।
अफसरों ने बताया कि बैठक में लिए गए इन महत्वपूर्ण निर्णयों से छत्तीसगढ़ राज्य में लौह और बॉक्साईट आधारित उद्योगों को उच्च तथा अच्छी श्रेणी के अयस्कों के कम परिवहन लागत पर सुगम उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
बैठक में मुख्य सचिव सुनील कुमार कुजूर, सचिव खनिज गौरव द्विवेदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुदित कुमार सिंह, खनिज विभाग के प्रबंध संचालक अलरमेल मंगई डी, सचिव वित्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, ऊर्जा विभाग के विशेष सचिव अंकित आनंद, महाप्रबंधक पीएस यादव सहित संचालक मंडल के सदस्य उपस्थित थे।

रायपुर। अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए शराबबंदी के वादे को अमलीजामा पहनाने से पूर्व सरकार इसके सभी पहलुओं पर विचार करना चाह रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को राज्य सरकार ने शराबबंदी के लिए दो समितियों के गठन का एलान किया। समिति में कितने सदस्य होंगे यह तो नहीं बताया गया पर यह तय किया गया कि एक समिति सर्वदलीय राजनीतिक दलों के सदस्यों की होगी तो दूसरी समाज के अलग-अलग वर्गों के बुद्धिजीवियों की। पहली समिति देश के विभिन्न् राज्यों में शराबबंदी की विफलताओं का अध्ययन करेगी तो दूसरी समिति समाज में शराबबंदी का अध्ययन कर उसकी रिपोर्ट देगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शराबबंदी पर निर्णय के लिए दो समितियां बनाने की घोषणा की। इससे पूर्व सरकार ने रमन सिंह कार्यकाल में गठित समिति की रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए नई कमेटी बनाने का निर्णय पहली ही कैबिनेट में लिया था। तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार शराबबंदी के लिए जो कमेटी गठित करेगी उसका स्वरूप कैसा होगा। सीएम ने जिस प्रकार की समिति बनाने की घोषणा की है उसमें कहा कि पहली समिति सर्वदलीय राजनीतिक दलों के सदस्यों की होगी। यह कमेटी उन राज्यों में अध्ययन करेगी जहां शराबबंदी लागू हुई पर सफल नहीं हुई। विफलताओं का अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी ताकि सरकार उस पर निर्णय कर ले सके। वहीं दूसरी समिति समाज के विभिन्न् वर्गों के लोगों की होगी समाज में शराबबंदी के लिए समाज की भूमिका के लिए रास्ता सुझाएगी। सीएम ने कहा कि दोनों समितियों का गठन जल्द ही किया जाएगा तथा गठित समितियों को अपनी रिपोर्ट देने के लिए समय सीमा निर्धारित की जाएगी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान घोटाले की एसआइटी ने जांच शुरू कर दी है। सरकार ने नान घोटाले की जांच के लिए आइजी एसआरपी कल्लूरी के नेतृत्व में एसआइटी का गठन किया है। कल्लूरी ने 11 सदस्यीय टीम को जिम्मेदारी बांट दी है। अब 110 पेज की नान डायरी की जांच शुरू की गई है।
पूर्व के जांच अधिकारियों ने अभी तक डायरी के सिर्फ पांच पेज की जांच की है। कोर्ट ने भी एसीबी को जांच के बाद पूरक चालान पेश करने का निर्देश दिया है। ईओडब्ल्यू-एसीबी के आला अधिकारियों ने बताया कि एसआइटी टीम की पहली बैठक मुख्यालय में हुई। इसमें कल्लूरी ने अधिकारियों को जांच के बिंदु तय करने के साथ ही जिम्मेदारियों का भी बंटवारा किया।
नान घोटाले में साढ़े पांच करोड़ रुपये नगद बरामद हुए थे। इसके साथ ही नान डायरी भी बरामद हुई थी। कांग्रेस सरकार ने आरोप लगाया है कि नान डायरी में बड़े लोगों के बचाने के लिए जांच पूरी तरह नहीं की गई। इसके बाद पूरे मामले की जांच एसआइटी ने शुरू की है।

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